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उत्तराखंड

लोकायुक्त एक्ट बना घी भरा हंसुआ ना उगलते बने न निगलते

देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार के लिए लोकायुक्त एक्ट घी भरा हंसुआ बन गया है न उगलते बनता है न निगलते. मुख्यमंत्री आवास पर 17 नवंबर को कांग्रेस व सहयोगी दलो की बैठक से तो यही निष्कर्ष निकलता है. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने बीसी खण्डूडी के कार्यकाल में लोकायुक्त विधेयक तैयार किया. इसकी सराहना अन्ना हजारे ने भी की है. बहुमत से उत्तराखण्ड विधान सभा में पारित इस विधेयक को राष्ट्रपति महोदय को भेजा गया. उन्होंने भी इस पर मुहर लगा कर वर्तमान कांग्रेस सरकार के लिए जबरदस्त परेशानी खड़ी कर दी है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह विधेयक एक्ट के रूप में एक कानून बन गया है जिसे लागू करना उत्तराखण्ड सरकार की मजबूरी हो गया है.
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार के लिए लोकायुक्त एक्ट घी भरा हंसुआ बन गया है न उगलते बनता है न निगलते. मुख्यमंत्री आवास पर 17 नवंबर को कांग्रेस व सहयोगी दलो की बैठक से तो यही निष्कर्ष निकलता है. पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने बीसी खण्डूडी के कार्यकाल में लोकायुक्त विधेयक तैयार किया. इसकी सराहना अन्ना हजारे ने भी की है. बहुमत से उत्तराखण्ड विधान सभा में पारित इस विधेयक को राष्ट्रपति महोदय को भेजा गया. उन्होंने भी इस पर मुहर लगा कर वर्तमान कांग्रेस सरकार के लिए जबरदस्त परेशानी खड़ी कर दी है. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद यह विधेयक एक्ट के रूप में एक कानून बन गया है जिसे लागू करना उत्तराखण्ड सरकार की मजबूरी हो गया है.
 
प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस एक्ट को ना लागू करने की घोषणा कर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. खूबी तो यह है कि उन्हीं के मंत्रिमण्डल के सहयोगी मंत्रियों तथा विस अध्यक्ष ने इस एक्ट को लागू करने की हिमायत कर सीएम के लिए समस्या खड़ी कर दी है. प्रदेश कांग्रेस सरकार लोकायुक्त एक्ट को न लागू कर प्रदेश की जनता के सामने गलत संदेश देने से बचना चाहती है और ये भी चाहती है कि कोई बीच का रास्ता निकल जाए ताकि यह कानून ना लागू हो इसके प्रावधानों से सरकार तथा इसके दायरे में आने वाले सभी लोग बच सके. सरकार इसके लिए बहाने ढूंढ़ रही है. दूसरी ओर विस अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने इस एक्ट को हूबहू लागू करने का बयान देकर चाय के प्याले में तूफान खड़ा करने का काम किया है. रही सही कसर पूरी कर दी है प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष मंत्री प्रसाद नैथानी तथा उनके सहयोगी मंत्रियों ने जो इस एक्ट को लागू करने के पक्ष में हैं.
 
इसी सन्दर्भ में सीएम ने 17 नवंबर को अपने आवास पर कांग्रेस तथा पीडीएफ विधायकों की एक बैठक आयोजित की जिसमें इस प्रकरण पर चर्चा की गई. इसे मुख्यमंत्री के पहल का विरोध ही कहेंगे ही 41 विधायकों में मात्र 23 विधायक इस बैठक में पहुंचे जिनमें पांच मंत्री भी शामिल हैं. इन मंत्रियों में पीडीएफ नेता मंत्री प्रसाद नैथानी, प्रीतम सिंह पंवार, सुरेन्द्र राकेश तथा कांग्रेस के मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी एवं अमृता रावत के नाम शामिल हैं. इन मंत्रियों में प्रीतम सिंह पंवार यूकेडी के सुरेन्द्र राकेश बसपा के तथा मंत्री प्रसाद नैथानी पुराने कांग्रेसी किन्तु निर्दलीय विधायक हैं जो पीडीएफ का नेतृत्व कर रहे हैं. इनके विरोध के बावजूद हरीश दुर्गापाल जो पीडीएफ के प्रमुख सदस्य हैं सीएम आवास पर बैठक में मौजूद थे. इस प्रकरण से लगता है कि पीडीएफ में भी लोकायुक्त कानून के मसले पर दो धड़े हैं जो अपने ही मंसूबे के विरोध में सरकार का साथ दे रहे हैं. हरीश दुर्गापाल पुराने कांग्रेसी किन्तु निर्दल जीते हुए विधायक हैं.
 
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार सरकार इस एक्ट को लागू करने से इंकार तो कर चुकी है पर आगामी लोकसभा चुनावों की दृष्टि से इसे पूरी तरह खारिज करना नही चाहती. कांग्रेस सरकार यह संदेश नहीं देना चाहती है कि वह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगााने में प्रभावी इस नये कानून को दरकिनार कर भ्रष्टचार को बढावा देना चाहती है. सरकार यह भी चाहती है कि भाजपा द्वारा किये गये तेज हमलों को किसी प्रकार से रोका जाए ताकि नुकसान भी न हो. वैसे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और पूर्व सीएम बीसी खण्डूडी ममेरे फुफरे भाई हैं. एक भाई ने कानून बनाया तो दूसरा भाई इसे लागू नहीं करना चाहता. गत सितंबर माह में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लोकायुक्त विधेयक विधिवत एक्ट बन गया. विधायी विभाग ने 24 सितंबर को इसे 27 वें एक्ट के रूप में अधिसूचित भी कर दिया लेकिन सीएम विजय बहुगणा मुख्यमंत्री तथा न्यायपालिका को इस एक्ट की जद में शामिल करने तथा इसके कुछ प्रावधानों से सहमत नही हैं. उन्होंने इस पर नये सिरे से विचार करने का बयान दिया था. अब अपने ही सहयोगियों के विरोध के बाद उन्हें फ्रंट फुट से बैक फुट पर आना पड़ा है. इसके लिए वो बीच का रास्ता तलाश रहे हैं यह बीच का रास्ता क्या है यहीं कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
 
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट का मानना है कि सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है जिसके कारण वह एक्ट लागू करना नहीं चाहती. नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार का पूरा ध्यान इस ओर है कि इस एक्ट को कैसे भटकाया जाए और लागू करने से रोका जाए. उन्होंने पुरानी जानकारी देते हुए बताया कि जब यह बिल सदन में लाया गया था तो उस समय नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत ने इस पर पूर्ण सहमति जताई थी. इस पर तत्कालीन विधायक और वर्तमान सांसद महेन्द्र सिंह माहरा ने अपना संशोधन प्रस्ताव भी वापस लिया था. सर्वसम्मति से पारित इस बिल को लागू ना करना कांग्रेस की भ्रष्टाचारी मानसिकता का प्रतीक है.
 
पीडीएफ के अध्यक्ष व सरकार के वरिष्ठ मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का मानना है कि पहले लोकायुक्त एक्ट को लागू किया जाए फिर इसमें संशोधन किया जाए. उन्होंने साफ कहा कि इस एक्ट को लेकर पीडीएफ ने पहले अपना रूख साफ कर दिया था. हम अपने पुराने ही बयान पर कायम हैं. उन्होंने साफ कहा कि हम भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं इस एक्ट से निश्चत रूप से भ्रष्टाचार दूर होगा हम इसके लागू करने के पक्षधर हैं. श्री नैथानी ने कहा कि इसकी कमियां और खामियां लागू करने पर ही दिखाई देंगी. जब कमियां दिखाई देंगी तो उन्हें दूर भी किया जाएगा. पीडीएफ नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार कानून लागू होने से काफी हद तक भ्रष्टाचार से बचा जा सकता है.
 
लेखक राम प्रताप मिश्र वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे 09412413304 पर संपर्क किया जा सकता है.
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