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काशी पत्रकार संघ का पिछला चुनाव पड़ा खटाई में

काशी पत्रकार संघ का वर्ष 2012-13 का चुनाव खटाई में पड़ गया है। इस चुनाव की वैधता पर सवाल उठाये जाने का मामला सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) सुभाष सिंह ने आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर अरुण शुक्ल के पास भेज दिया है। ज्ञात है कि उक्त चुनाव से पूर्व ही तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) अशोक त्रिपाठी ने काशी पत्रकार संघ की प्रबंध समिति को कालातीत घोषित कर दिया था। इसके बावजूद संघ के निवर्तमान महामंत्री कृष्णदेव नारायण राय ने तत्कालीन पदाधिकारियों व चुनाव अधिकारियों को भ्रमित कर अवैधानिक ढंग से चुनाव कराया तथा बाद में खुद के संघ का निर्वाचित अध्यक्ष होने का दावा किया। इसपर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. श्रीकांत तिवारी ने उक्त चुनाव को अवैधानिक बताते हुए इसके खिलाफ माननीय इलाहाबाद हाईकोट में एक रिट याचिका दायर की थी। 
काशी पत्रकार संघ का वर्ष 2012-13 का चुनाव खटाई में पड़ गया है। इस चुनाव की वैधता पर सवाल उठाये जाने का मामला सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) सुभाष सिंह ने आगे की कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर अरुण शुक्ल के पास भेज दिया है। ज्ञात है कि उक्त चुनाव से पूर्व ही तत्कालीन सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) अशोक त्रिपाठी ने काशी पत्रकार संघ की प्रबंध समिति को कालातीत घोषित कर दिया था। इसके बावजूद संघ के निवर्तमान महामंत्री कृष्णदेव नारायण राय ने तत्कालीन पदाधिकारियों व चुनाव अधिकारियों को भ्रमित कर अवैधानिक ढंग से चुनाव कराया तथा बाद में खुद के संघ का निर्वाचित अध्यक्ष होने का दावा किया। इसपर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. श्रीकांत तिवारी ने उक्त चुनाव को अवैधानिक बताते हुए इसके खिलाफ माननीय इलाहाबाद हाईकोट में एक रिट याचिका दायर की थी। 
 
याचिका में चुनाव की अवैधानिकता से उच्च न्यायालय को अवगत कराया गया था। इसी क्रम में डॉ. श्रीकांत तिवारी ने इस अवैधानिक चुनाव के परिणामों की घोषणा के खिलाफ सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) सुभाष सिंह के यहां अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। सहायक रजिस्ट्रार ने मामले की लंबी सुनवाई तथा साक्ष्यों को देखने के उपरांत इस चुनाव में अध्यक्ष चुने गये कृष्णदेव नारायण राय तथा महामंत्री चुने गये राजेंद्र रंगप्पा को कई बार संपूर्ण दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था। लेकिन ये लोग कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके क्योंकि इनको डर था कि ऐसा करने पर पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त के कार्यकाल से लेकर उनके समय तक की सारी पोल पट्टी खुल जायेगी। इस पूरे चुनाव के दौरान पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त किंग मेकर की भूमिका में रहे और इन्होंने अपनी सोची समझी रणनीति के तहत लंबे समय से बेरोजगार राजेंद्र रंगप्पा को महामंत्री जैसे महत्वपूण पद का चुनाव लड़ाया। वो आम पत्रकार साथियों को यह भरोसा दिलाने में कामयाब रहे कि पत्रकारों के हक और हुकूक की लड़ाई समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी के साथ मिलकर लड़ेंगे। पत्रकार साथियों को क्या पता जिस रंगप्पा पर उन्होंने भरोसा जताया है ओ शुरू से हर मोर्चे पर कमजोर रहे हैं। संघ का चुनाव ही अवैधानिक था। 
 
सबसे मजेदार बात यह रही कि योगेश कुमार गुप्त को जो डॉ. दयानंद संघ के विभिन्न पदों के चुनाव में जिताने के लिए अहम भूमिका निभाते रहे उन्हीं के खिलाफ योगेश ने केडीएन राय को अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया। इसका परिणाम रहा कि डॉ. दयानंद को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा महामंत्री पद के दावेदार रामात्मा श्रीवास्तव, अध्यक्ष पद की दावेदार सरोज सिन्हा, उपाध्यक्ष पद के दावेदार वीरेंद्र श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष पद के दावेदार सुभाष चंद सिंह आदि को हर कीमत पर हराने के योगेश, केडीएन राय आदि लामबंद हो गये। इससे खिन्न होकर वीरेंद्र श्रीवास्तव, जो योगेश कुमार गुप्त के समर्थक रहे, ने काशी पत्रकार संघ की सदस्यता से बाकायदा इस्तीफा दे दिया। संघ का अवैधानिक चुनाव हो जाने के बाद डॉ. दयानंद, रामात्मा श्रीवास्तव आदि ने इस चुनावी खेल के तरीके पर अफसोस जताया था। 
 
इस चुनाव को अवैध से वैध कराने के चक्कर में संघ के पूर्व अध्यक्ष योगेश कुमार गुप्त कई बार राजेंद्र रंगप्पा और केडीएन को साथ लेकर सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) सुभाष सिंह के यहां जाते रहे लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी। इतना ही नहीं इस चुनाव को सही ठहराने के लिए वो समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अजय मुखर्जी को साथ लेकर सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) के यहां गये थे। बाद में जब अजय मुखर्जी को इस बात का आभास हुआ कि यहां तो समाचार पत्र कर्मचारियों के हक व हुकूक की लड़ाई नहीं बल्कि पत्रकारों की एकता के खिलाफ मोर्चेबंदी हो रही है तो उन्होने स्वयं ही सहायक रजिस्ट्रार के कार्यालय जाना छोड़ दिया। क्लाउन टाइम्स से अनौपचारिक वार्ता के दौरान श्री मुखर्जी ने इस बात को स्वीकार किया कि वरिष्ठ पत्रकार डॉ. श्रीकांत तिवारी व अशोक कुमार मिश्र की लड़ाई जायज है और जो कार्य वर्तमान पदाधिकारी कर रहे हैं उससे पत्रकारों की एकता को ही खतरा है। मुखर्जी का यह भी विचार था कि बातचीत के जरिये कोई रास्ता निकले पर उनका प्रयास विफल रहा। 
 
अंतत: जो होना था वही हुआ। केडीएन राय और राजेंद्र रंगप्पा को फंसाकर योगेश कुमार गुप्त वाराणसी से प्रकाशित समाचार पत्र जन संदेश को छोड़कर अपने उज्जवल भविष्य के लिए सतना (मध्य प्रदेश) चले गये और वहां से प्रकाशित जन संदेश में नौकरी कर ली। आज योगेश के बिना राजेंद्र रंगप्पा एकला चलो की तर्ज पर क्या कर सकते हैं सब जानते हैं। पर इस बात को लेकर परेशान संघ के अध्यक्ष के रूप में केडीएन राय अपना और संघ का वजूद कैसे बचायें उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। फिलहाल यह पूरा मामला सहायक रजिस्ट्रार (सोसायटीज एंड चिट्स) ने एसडीएम सदर के पास अगली कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
(क्लाउन टाइम्स से साभार)
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