Jitendra Dixit : तहलका वाले तरूण तेजपाल छह महीने तक प्राश्चित्य करेंगे। आत्मशुद्धि का यह सनातनी फंडा तो सही है पर क्या उनके इस कदम के बाद कानून को कुछ करने की जरूरत नहीं है? तहलका के अंदर संपादकीयकर्मी युवती से तरूण तेजवाल ने जिस तरह की हरकत की, वैसी ही करतूत अपनी कुटिया में करने की वजह से आसाराम सलाखों के पीछे हैं।
मीडिया ने आसाराम की हरकतों को उजागर करने के लिए चर्चाओं की श्रंखला चला रखी है। ऐसे में यदि तरूण तेजपाल प्रकरण ठंडे बस्ते में डाला जाता है तो यह पक्षपात ही होगा। खबरिया चैनलों के रूख का इंतजार है। दूसरी तरफ गुजरात में युवती की जासूसी मामले में मुद्दई सुस्त और गवाह चुस्त की तरह हरकत में आये महिला आयोग और केंद्रीय गृह मंत्री क्या इस प्रकरण का स्वत: संज्ञान लेंगे? देखना है कि कानून क्या करता है?
मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र दीक्षित के फेसबुक वॉल से.





