: कानाफूसी : कई तरह के नए प्रकरणों की चर्चा है मुंबई की मीडिया जगत में : मुंबई के मीडिया जगत में पिछले बहुत दिनों से एकदम सन्नाटा फैला हुआ है। जिग्ना वोरा के जेल की सलाखों के पीछे चले जाने के पश्चात मीडिया जगत में डर का माहौल है। परंतु फिर भी कुछ घटनाएं घटी हैं, जिनके बारे में अंदर ही अंदर बहुत सारे मीडिया के समाचार कानाफूसी के स्वरूप में उभर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर प्रकरण क्राइम फिल्ड के लोगों से जुडे हैं।
जे डे तथा जिग्ना वोरा को मुंबई के मीडिया के लोग भूलकर मीडिया जगत में भीतर भीतर किसी के बलात्कार की शिकार से रिश्वतखोरी करने, किसी बेरोजगार महिला पत्रकार को नौकरी के बहाने शोषण की बात, लड़कीबाजी, फोन टैपिंग, लड़कीबाज पत्रकार की पत्नी को फोन पर जानकारी देने तथा कुछ लोगों के बारे में चिट्ठीबाजी के साथ साथ बिल्डरों से हफ्तावसूली में फंसने की खबरें चार पांच सप्ताह से आपसी चर्चा में बहुत ज्यादा आ रही हैं। जब शूट पर या पीसी या किसी इवेंट पर पत्रकार लोग सामूहिक रूप से मिलते हैं, तभी इन खबरों के बारे में सार्वजनिक चर्चा तसल्ली से होती है।
महिला पत्रकारों में भी ये खबरें बहुत ज्यादा बातचीत का भाग बन रही हैं क्योंकि समस्त प्रकरण महिला पत्रकारों की इज्जत से जुड़े हुए हैं, एवं महिला पत्रकारों में इस कांड से जुड़े पुरुष पत्रकारों से हाय हैलो का रिश्ता भी नहीं रखा जा रहा है। अत: बहुत सारे इन्वेस्टीगेटिव क्राइम जर्नलिस्ट रुचिवश होकर इस मामले से संबंधित महिला पत्रकार की तलाश में जुटे हुए हैं। चिट्ठी में लड़कीबाज एक पत्रकार का नाम तो सार्वजनिक हो गया है तभी से वह बहुत दिनों से गायब है। सभी को पता है कि दस साल के कैरियर में वह पत्रकार बारह पंद्रह जगह से धकियाया जा चुका है, कई जगहों पर टेंपरेरी या स्ट्रिंगर जैसा काम मिलने के बाद भी सुधार ना होने के बाद समस्त स्थानों से इन्ही आदतों की वजह से भगाया बताया गया है।
इस कांड से जुडे समाचार सभी के पास हैं, परंतु इस समस्त मामले में कोई भी पत्रकार साथी मोबाइल फोन पर बात नहीं कर रहा है। फोन टैप होने के डर की वजह के कारण बहुत सारे पत्रकार लैंडलाइन पर ही आपस में चर्चा कर लेते हैं। मुंबई के मीडिया में क्या हो रहा है यह चर्चा का विषय है। सभी साथी चुपचाप बात कर रहे हैं। मीडिया में मुंबई के दो चैनलों समय तथा टीवी9 सहित अन्य सभी मीडिया हाउसों में इस प्रकरण को लेकर चर्चा बहुत जोरों में हैं। जिग्ना वोरा जबसे जेल गई है, मुंबई के पत्रकार फोन पर बात करने के मामले में काफी घबराए हुए हैं क्योंकि अपनी पोल खुलने तथा किसी दूसरे के मामले में फंस जाने का डर सभी को सता रहा है।
मुंबई के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





