Rakesh Kumar Singh : संजीव सिन्हा भाई, आरएसएस कार्यकर्ता के तौर पर आपकी इज्जत करता रहा हूं. तथ्यों को गढ़ने-गढाने में संघ के हूनर और कारीगरी का कायल हूं. गुरुजी ने हवा में शीशमहल खड़ा करने और उस पर आस्था का पताका लहरा कर क्लाइमेक्स तैयार करने का जो कौशल विकसित किया, समय-समय पर संघ को उसका लाभ मिला भी है.
वश में होता तो सारी तारीख-फारीख उलट-पलट कर भारत रत्न का तमगा उनकी समाधि पर चढा आता. वहां उनके पसंदीदा स्वर में प्रशस्ति पत्र की रिकॉर्डिंग दिन भर बजते रहने की अनुमति भी प्रशासन से ले आता! उनसे सुयोग्य पात्र आज़ाद भारत में और न होगा! Anuranjan Jha ARSD कॉलेज में मेरे जुनियर रहे हैं. उनका व्यवहार कभी ऐसा नहीं लगा कि वे ख़ुद की जाल में फंस जाने का जोखिम लेंगे.
Yashwant बाबू, यक़ीन नहीं होता कि अनुरंजन ने ये 'खुलासा' किया है! इस 'खुलासे' से निकले शब्दों का अंदाज़ा लगाएं तो पाएंगे कि 'टारगेट्स' ने बहुत कम बोला. ये ज़रूर लगा कि खुफिया पत्रकारों ने अंड-बंड सवालों और उल्टी-सीधी पेशकश से ख़ुद को ज़रूर एक्सपोज़ कर लिया. जनता असली नाम-ठिकाना जान जाए इन टॉर्च बियरर्स का तो मुमकिन है कुछ उनके घर जाकर भी थूक आएं. बाक़ी: कबीरा इस संसार में भांति-भांति के लोग… कुछ करते खाली विनेाद हैं, कुछ भारी मनोविनोद!!
राकेश कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.





