Akhilesh Akhil : तरुण तेजपाल ने शर्मशार कर दिया। बेटी कि सहेली और दोस्त कि बेटी के साथ उसने जो भी किया उसे कानून बनाने वाले क्या दंड देंगे देखना होगा। सबसे पहले तरुण पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। सभी पत्रकारो का यह दायित्व है कि इस पर दवाब दे और तरुण को कानून के हवाले करे। दरअसल मीडिया के नाम पर देश में क्या क्या होता है इसकी जानकारी संघर्ष करने वाले पत्रकार नहीं रख पाते। मैं तेजपाल के कई खेल को खोल सकता हूं, लेकिन अभी नहीं। अभी और इन्तजार करें।
काफी पहले भड़ास पर हमने रन्डीवाज संपादक और रंडल पत्रकारिता पर सीरीज लिखने कि शुरुआत कि थी। कुछ लोगों ने विरोध भी किया था। एक रंडल संपादक ने अपनी पत्रिका में मेरी छपी रिपोर्ट को हटा दिया था. पत्रकारिता के दो दशक से ज्यादा के अनुभवो में जो चीजे सामने आयी है उसमें एक बात तो यह है कि अब खोटे सिक्के असली सिक्के पर भारी है। पत्रकारों कि एक ऐसी जमात खड़ी हो गयी है जो केवल तिकड़म के दम पर ही पत्रकारिता कि सत्ता पर काबिज है। वक्त आने दीजिये आज के दौर के ४० से ज्यादा ऐसे दलाल कथित पत्रकार मीडिया के मालिको को मुख्यधारा से काटकर न केवल पत्रकारिता कि ऐसी तैसी कि है बल्कि संस्थान को लूट कर सैकड़ों को बेरोजगार भी किया है। बदलते परिवेश में रन्डीवाज पत्रकारो कि लम्बी सूची है। कई दलाल पत्रकार तो लड़की मालिक तक पंहुचा रहे है। आप कहे तो कुछ ऐसा शुरू किया जाय।
पत्रकार अखिलेश अखिल के फेसबुक वॉल से.





