Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

विविध

तरुण तेजपाल, शोमा चौधरी और देश की न्यायिक व्यवस्था के नाम खुला पत्र

तहलका के मुख्य संपादक (मालिक) तरुण तेजपाल के कृत्यों से तमाम संवेदनशील पत्रकार आहत हैं। मैंने तो तहलका में काम भी किया है इसलिए इस संस्थान से जुड़ी अच्छी और बुरी घटना से मैं भी अच्छा या बुरा महसूस करता हूं। यह घटना तो मानवता को शर्मशार करने वाली है। आहत इसलिए भी ज्यादा हूं क्योंकि तरुण एक अच्छे और संवेदनशील पत्रकार रहे हैं। वे संस्थान में बराबरी वाले भाव में जीने की मुखालफत करने वाले लोगों में या ऐसे मानक तय करने वाले लोगों में से रहे हैं। निश्चित तौर पर इस घटना ने तहलका के साथ जुड़े पत्रकार और पाठकों को भी हतप्रभ किया होगा। उनके लिए इस घटना के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं होगा। फिर तहलका से जुड़े पत्रकार तो तरुण पर गर्व करते थे।
तहलका के मुख्य संपादक (मालिक) तरुण तेजपाल के कृत्यों से तमाम संवेदनशील पत्रकार आहत हैं। मैंने तो तहलका में काम भी किया है इसलिए इस संस्थान से जुड़ी अच्छी और बुरी घटना से मैं भी अच्छा या बुरा महसूस करता हूं। यह घटना तो मानवता को शर्मशार करने वाली है। आहत इसलिए भी ज्यादा हूं क्योंकि तरुण एक अच्छे और संवेदनशील पत्रकार रहे हैं। वे संस्थान में बराबरी वाले भाव में जीने की मुखालफत करने वाले लोगों में या ऐसे मानक तय करने वाले लोगों में से रहे हैं। निश्चित तौर पर इस घटना ने तहलका के साथ जुड़े पत्रकार और पाठकों को भी हतप्रभ किया होगा। उनके लिए इस घटना के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं होगा। फिर तहलका से जुड़े पत्रकार तो तरुण पर गर्व करते थे।
 
शोमा चौधरी भी नैतिकता और साहस की प्रतिमूर्ति के तौर पर तहलका के अंदर और बाहर जानी जाती रहीं। उन्होंने हाल ही में हेमराज-आरुषि हत्याकांड में सीबीआइ की भूमिका को लेकर शानदार आवरण-कथा लिखी। मैं उनकी लेखनी का कायल रहा हूं। शोमा द्वारा तरुण की अपनी ही बेटी की सहेली के साथ यौन-शोषण करने की बात को तहलका का अंदरुनी मामला बताने की घटना ने तो और भी अचरज में डाल दिया। यह तो सामंती युग में होता था कि जमींदारों के यहां काम करने वाली महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता था और पीड़िता को यह कहकर चुप करा दिया जाता था कि चुप रहो। वे हमारे मालिक हैं। अन्नदाता हैं। सचमुच स्वतंत्र, निष्पक्ष, निर्भीक का नारा देने वाले तहलका के संपादकों के इस दोहरे व्यवहार ने विश्वास जैसे शब्द को खोखला किया है। मतलब साफ है कि तहलका के लिए नैतिकता बस बेचने और लुभाने की वस्तु भर है। 
 
मैं पीडि़त पत्रकार के लिए उचित न्याय की मांग करता हूं और तहलका के पत्रकार-संपादक-मालिक तरुण तेजपाल के इस कृत्य का घोर विरोध करता हूं। विरोध के तौर पर मैं पीड़िता पत्रकार साथी से वादा करता हूं कि अपने बायो-डाटा में आजीवन तहलका में काम करने का जिक्र नहीं करूंगा। मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूं कि तहलका के मालिक और संपादक तरुण पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और मनुष्यता को कलंकित किया है। 
 
स्वतंत्र मिश्र
21 नवंबर 2013
 
         लेखक स्वतंत्र मिश्र तहलका से जुड़े रहे हैं. उनसे [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है.
 
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...