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तरुण तेजपाल, शोमा चौधरी और देश की न्यायिक व्यवस्था के नाम खुला पत्र

तहलका के मुख्य संपादक (मालिक) तरुण तेजपाल के कृत्यों से तमाम संवेदनशील पत्रकार आहत हैं। मैंने तो तहलका में काम भी किया है इसलिए इस संस्थान से जुड़ी अच्छी और बुरी घटना से मैं भी अच्छा या बुरा महसूस करता हूं। यह घटना तो मानवता को शर्मशार करने वाली है। आहत इसलिए भी ज्यादा हूं क्योंकि तरुण एक अच्छे और संवेदनशील पत्रकार रहे हैं। वे संस्थान में बराबरी वाले भाव में जीने की मुखालफत करने वाले लोगों में या ऐसे मानक तय करने वाले लोगों में से रहे हैं। निश्चित तौर पर इस घटना ने तहलका के साथ जुड़े पत्रकार और पाठकों को भी हतप्रभ किया होगा। उनके लिए इस घटना के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं होगा। फिर तहलका से जुड़े पत्रकार तो तरुण पर गर्व करते थे।
तहलका के मुख्य संपादक (मालिक) तरुण तेजपाल के कृत्यों से तमाम संवेदनशील पत्रकार आहत हैं। मैंने तो तहलका में काम भी किया है इसलिए इस संस्थान से जुड़ी अच्छी और बुरी घटना से मैं भी अच्छा या बुरा महसूस करता हूं। यह घटना तो मानवता को शर्मशार करने वाली है। आहत इसलिए भी ज्यादा हूं क्योंकि तरुण एक अच्छे और संवेदनशील पत्रकार रहे हैं। वे संस्थान में बराबरी वाले भाव में जीने की मुखालफत करने वाले लोगों में या ऐसे मानक तय करने वाले लोगों में से रहे हैं। निश्चित तौर पर इस घटना ने तहलका के साथ जुड़े पत्रकार और पाठकों को भी हतप्रभ किया होगा। उनके लिए इस घटना के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं होगा। फिर तहलका से जुड़े पत्रकार तो तरुण पर गर्व करते थे।
 
शोमा चौधरी भी नैतिकता और साहस की प्रतिमूर्ति के तौर पर तहलका के अंदर और बाहर जानी जाती रहीं। उन्होंने हाल ही में हेमराज-आरुषि हत्याकांड में सीबीआइ की भूमिका को लेकर शानदार आवरण-कथा लिखी। मैं उनकी लेखनी का कायल रहा हूं। शोमा द्वारा तरुण की अपनी ही बेटी की सहेली के साथ यौन-शोषण करने की बात को तहलका का अंदरुनी मामला बताने की घटना ने तो और भी अचरज में डाल दिया। यह तो सामंती युग में होता था कि जमींदारों के यहां काम करने वाली महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता था और पीड़िता को यह कहकर चुप करा दिया जाता था कि चुप रहो। वे हमारे मालिक हैं। अन्नदाता हैं। सचमुच स्वतंत्र, निष्पक्ष, निर्भीक का नारा देने वाले तहलका के संपादकों के इस दोहरे व्यवहार ने विश्वास जैसे शब्द को खोखला किया है। मतलब साफ है कि तहलका के लिए नैतिकता बस बेचने और लुभाने की वस्तु भर है। 
 
मैं पीडि़त पत्रकार के लिए उचित न्याय की मांग करता हूं और तहलका के पत्रकार-संपादक-मालिक तरुण तेजपाल के इस कृत्य का घोर विरोध करता हूं। विरोध के तौर पर मैं पीड़िता पत्रकार साथी से वादा करता हूं कि अपने बायो-डाटा में आजीवन तहलका में काम करने का जिक्र नहीं करूंगा। मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूं कि तहलका के मालिक और संपादक तरुण पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और मनुष्यता को कलंकित किया है। 
 
स्वतंत्र मिश्र
21 नवंबर 2013
 
         लेखक स्वतंत्र मिश्र तहलका से जुड़े रहे हैं. उनसे [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है.
 
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