: 10 जनवरी को होगी अगली सुनवाई : मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हस्ताक्षर कराने का मामला : बनारस : जागरण प्रबंधन को 'गुलामी बांड' पर अपने कर्मचारियों से हस्ताक्षर कराना उसके लिए गले की फांस बन गया है. अब वो तारीख पर तारीख के सहारे बचने की कवायद में जुटे हुए हैं और लेबर विभाग में उपस्थित न होकर अपनी ताकत और लेबर विभाग की औकात भी बता रहे हैं. पिछली दो सुनवाइयों से जागरण का कोई भी प्रतिनिधि लेबर आफिस नहीं पहुंच रहा है. जिसके बाद असिस्टेंट लेबर कमिश्नर ने जागरण को नोटिस जारी करके 10 जनवरी को उपस्थित होने को कहा है.
कुछ समय पहले ''हमको मजीठिया वेज बोर्ड की कोई जरूरत नहीं है, हम अपनी सेलरी से बहुत खुश हैं और अपनी स्वेच्छा से हस्ताक्षर कर रहे हैं'' जैसे वाक्यों से लिखे गुलामी के बांड पर जागरण प्रबंधन ने अपने कर्मचारियों से हस्ताक्षर करवाया था. ज्यादातर लोग इच्छा न होते हुए भी नौकरी जाने के डर और दबाव के चलते इस गुलामी बांड पर हस्ताक्षर कर दिया था. हस्ताक्षर करने वालों में मजबूर, डरपोक और चाटुकार सभी शामिल थे. पर राजाराम नामक एक कर्मचारी ने न केवल गुलामी बांड भरने से इनकार कर दिया बल्कि उसने तमाम जगहों पर शिकायत भी कर दी.
पत्रकारों का अहित होते देख काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष योगेश गुप्ता पप्पू तथा समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अजय मुखर्जी दादा ने भी लेबर कमिश्नर आफिस में इसकी शिकायत की तथा अंदेशा जताया कि इससे औद्योगिक अशांति का माहौल बन सकता है क्योंकि जागरण प्रबंधन अपने कर्मचारियों से जबरिया हस्ताक्षर करवा रहा है. जिस पर अपर श्रमायुक्त ने जागरण प्रबंधन को नोटिस जारी करके 20 दिसम्बर को अपना प्रतिनिधि सुनवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया.
20 दिसम्बर की सुनवाई के दौरान जागरण की तरफ से प्रबंधन के दो कारिंदे अंकुर चड्ढा एवं निशात अली पहुंचे. दूसरी तरफ से योगेश गुप्ता एवं अजय मुखर्जी पहुंचे. अपर श्रमायुक्त ने हस्ताक्षर अभियान की सच्चाई जाननी चाही, पर जागरण के लोग अपनी बातों से उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाए. उन्होंने यह जरूर बताने की कोशिश की कि सभी ने स्वेच्छा से 'गुलामी बांड' पर अपने हस्ताक्षर किए हैं. किसी से जबरदस्ती नहीं की गई है. जागरण के कारिंदों द्वारा दी गई सफाई का विरोध पप्पू एवं दादा ने किया. जिसके बाद अपर श्रमायुक्त ने जागरण के कारिंदों को 28 दिसम्बर को 'गुलामी बांड' के साथ मौजूद होने का निर्देश जारी किया.
अपर श्रमायुक्त के आदेश की अवहेलना करते हुए जागरण प्रबंधन ने 28 को किसी भी कर्मचारी को लेबर कमिश्नर के कार्यालय नहीं भेजा. जागरण की तरफ से किसी के न आने के चलते अपर श्रमायुक्त ने सुनवाई की तारीख बढ़ाकर चार जनवरी कर दी तथा इसकी सूचना जागरण को भिजवा दी. पर जागरण प्रबंधन ने अपर श्रमायुक्त के आदेशों-निर्देशों और सूचनाओं को अपने यहां के किसी रद्दी की टोकरी में डाल दी तथा चार जनवरी यानी आज भी अपर श्रमायुक्त में कार्यालय उपस्थित नहीं हुए, जबकि दूसरे पक्ष के दोनों लोग सुनवाई के लिए पहुंचे थे.
जागरण प्रबंधन की इस 'अदा' से नाराज लेबर विभाग ने आज फिर जागरण को नोटिस जारी करके दस जनवरी को लेबर कोर्ट में जारी होने का फरमान सुनाने जा रहा है. सहायक समायुक्त अनुराग मिश्रा ने एक बार फिर नोटिस जारी किया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जागरण प्रबंधन एक बार फिर अपनी पुरानी 'अदा' दिखाता है या 'गुलामी बांड' के साथ लेबर कार्यालय में उपस्थित होता है. अब सबकी निगाहें दस जनवरी पर लग गई हैं जब लेबर विभाग और जागरण अपनी-अपनी 'अदाएं' दिखाएंगे.





