Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

चैनलों के चुनावी कार्यक्रमों में किसी दिन होगा उग्र हमला

भीलवाड़ा में बुधवार रात साढ़े आठ बजे इंडिया न्यूज़ के चुनावी कार्यक्रम 'किस्सा कुर्सी का' के दौरान जिस तरह से वहां मौजूद लोगों ने हंगामा किया, उससे लगने लगा है कि किसी दिन ऐसे प्रोग्रामों के दौरान भारी खून-खराबा होगा। इस कार्यक्रम के दौरान लोग इतने उग्र हो गए कि वे एंकर का कॉलर पकड़कर माइक छीनने लगे, और जोर-जोर से भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे।
भीलवाड़ा में बुधवार रात साढ़े आठ बजे इंडिया न्यूज़ के चुनावी कार्यक्रम 'किस्सा कुर्सी का' के दौरान जिस तरह से वहां मौजूद लोगों ने हंगामा किया, उससे लगने लगा है कि किसी दिन ऐसे प्रोग्रामों के दौरान भारी खून-खराबा होगा। इस कार्यक्रम के दौरान लोग इतने उग्र हो गए कि वे एंकर का कॉलर पकड़कर माइक छीनने लगे, और जोर-जोर से भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे।
 
कार्यक्रम में कांग्रेस प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद नेता ने यह तक बोल दिया कि तुम साले बीजेपी के लोगों से ही सवाल पूछते हो, कांग्रेस वालों से फटती है। नौबत यहां तक पहुंच गई कि चैलन का ऑडियो बंद करना पड़ा और कार्यक्रम को बीच में ही रोकना पड़ा। तभी पुलिस ने किसी तरह से बेकाबू लोगों को काबू में किया। सवाल उठता है कि चुनावों के वक्त सभी चैनल एक ही रास्ते पर क्यों चल पड़ते हैं। इस समय चुनावी वक्त है, सभी चैनलों के कार्यक्रम स्टूडियों के अंदर न होकर बाहर खुले मैदान में हो रहे हैं। बुधवार को ही इंडिया टीवी का कार्यक्रम में दिल्ली के लक्ष्मीनगर में चल रहा था, उस दौरान भी यही हालात पैदा हो गए। इन्हीं कार्यक्रमों के चलते दीपक चौरसिया पर कई बार जानलेवा हमला हो चुका है। जिस कार्यक्रम को खूबसूरत एंकर करतीं हैं, उसमें भीड़ अपने आप बढ़ जाती है। कार्यक्रम में लोग एंकर पर फब्तियां मारना बिल्कुल भी नहीं चूकते हैं।
 
कार्यक्रमों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा के बिल्कुल भी इंतजामात नहीं होते हैं, जान हथेली पर रखकर वह कार्यक्रम करते हैं। प्राइम टाइम के समय पिछले कुछ दिनों से सभी खबरिया चैनलों पर इसी तरह की नौटंकी दिखाई जा रही है। इन कार्यक्रमों की दर्शक संख्या ना के बराबर है। सोचने वाली बात है अगर कोई नेशनल चैनल विधानसभा चुनाव के दौरान भीलवाड़ा विधानसभा में जाकर कार्यक्रम करता है, तो उसे जम्मू, मुंबई, दिल्ली या किसी और जगह का दर्शक क्यों देखे उस कार्यक्रम को? चैनल प्रबंधन को समझना चाहिए कि उक्त कार्यक्रमों में दर्शक संख्या ना के बराबर होती है। अगर इन कार्यक्रमों के चलते कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसके जिम्मेवार सिर्फ चैनल ही होंगे।
 
लेखक रमेश ठाकुर युवा पत्रकार हैं. इनसे [email protected] के जरिए संपर्क किया जा सकता है.
 
 
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...