इलाहाबाद। अपनी कलम से गांव की माटी और गांव-गिरांव की खुशबू बिखेरने वाले पत्रकार साथी शिवकुमार पांडेय ने इस नश्वर संसार को अलविदा कह दिया। दो दिन पहले अचानक वे साथ छोड़ गए। सूचना स्तब्ध कर देने वाली थी, पर विश्वास करना ही पड़ा। कई मित्रों ने सूचना की पुष्टि कर दी तो मानना ही पड़ा। यारों के यार की पहचान रखने वाले पत्रकार साथी शिवकुमार का अचानक यूं बिछड़ जाना बेहद तकलीफदेह है। पत्रकारिता करने के शुरूआती दिनों में राष्ट्रीय सहारा इलाहाबाद के लिए रिपोर्टिंग करने के दौरान शिवकुमार पांडेय से जो जुड़ाव और लगाव हुआ वो आखिरी समय तक बरकरार रहा।
यदा कदा सोरांव जाना होता तो शिवकुमार से मिले और उनकी चाय-पान के बिना लगता जैसे कुछ पीछे छूटा जा रहा हो। कई बार उनका उलाहना भी मोबाइल पर सुनना पड़ता-सोरांव आए और बगैर मिले चले गए, ऐसा ही होगा अब बड़के भइया? उनकी उलाहना में आत्मीयभरा अधिकार और प्यारभरा गुस्सा दोनों ही होता। तो ये थी रिश्ते की महक और गमक। शिवकुमार और शिवाशंकर की युगल जोड़ी कई लोगों के बीच अक्सर हिकारतभरी भी होती थी। इधर, हम दोनों को अपनी दोस्ती का गर्व… शोले सिनेमा के जय-वीरू की तरह… ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे। पर ये क्या किया शिव तूने, यार चुपचाप चले गए। अच्छा नहीं किया दोस्त! पत्रकार बिरादरी तुम्हें कैसे भूल सकती है दोस्त! तुम्हारी कमी खलने वाली है।
इलाहाबाद से वरिष्ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की श्रद्धांजलि