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जब हिन्दुस्तान अखबार चल निकला तो प्रबंधन ने निकाल बाहर कर दिया

यशवंत जी नमस्कार, आप हमारा सहयोग कर रहे हैं उसके लिए धन्यवाद. हम भड़ास4मीडिया के माध्यम से ये अपील करना चाह रहे हैं कि जो भी भाई बन्धु मुझे लेबर लॉ से सम्बन्धित सलाह देना चाह रहे हों तो कृपा करके मेरे मोबाइल नं 07275790755 पर दें ताकि हिन्दुस्तान के खिलाफ हम लोग सख्त और त्वरित कार्रवाई कर सकें.
यशवंत जी नमस्कार, आप हमारा सहयोग कर रहे हैं उसके लिए धन्यवाद. हम भड़ास4मीडिया के माध्यम से ये अपील करना चाह रहे हैं कि जो भी भाई बन्धु मुझे लेबर लॉ से सम्बन्धित सलाह देना चाह रहे हों तो कृपा करके मेरे मोबाइल नं 07275790755 पर दें ताकि हिन्दुस्तान के खिलाफ हम लोग सख्त और त्वरित कार्रवाई कर सकें.
 
हिन्दुस्तान, कानपुर अपनी कमी छिपाने के लिए रोज नई नई चालें चल रहा है और अपने ही जाल में फंसता जा रहा है. एकतरफ हमारे लीगल नोटिस को कानपुर के जीएम नरेश पाण्डेय लेने से मना कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ हम चारों कर्मचारियों के घर नोटिस भेज रहे हैं. हिन्दुस्तान के द्वारा दूसरी जांच कमेटी 22 नवम्बर को कानपुर कार्यालय में बैठाई गई थी जिसमें हम कर्मचारियों की तरफ से कोई नहीं गया. 31 अक्टूबर को पहली बैठक में हम चारों में से कोई नहीं गया. हम लोगों ने इनकी इंक्वायरी के खिलाफ जवाब असिस्टेंट लेबर कमिश्नर को दे दिया है जिस पर उन्होंने अपनी तरफ से तुरन्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है जो यूपी कर्मचारियों की स्ट्राइक के कारण लेट हो गया है.
 
कानपुर के जीएम नरेश पाण्डेय कूटनीति और षणयंत्रों से हम लोगों को अपने जाल में फंसाना चाहते हैं लेकिन हम लोग ऐसे कूटनीति और षणयंत्रों को पहले ही परास्त कर चुके हैं. नरेश पाण्डेय दिल्ली के मैनेजमेंट से अपनी वाह-वाही लूटने के चक्कर में अपने ही कर्मचारियों का ऐसा उत्पीड़न कर रहे हैं कि वैसा तो जल्लाद भी नहीं कर सकता. अगर उनके पास थोड़ी भी इंसानियत बची होती तो वो लीगल प्वाइंट से लड़ते, हमारे लीगल नोटिस को रिसीव करते और अपना लीगल नोटिस हमें देते फिर कोई कार्रवाई होती. लेबर कमिश्नर जब उन्हें अपने कार्यालय में बुलाते हैं तो उसका सामना नहीं करते और पीठ पीछे हम लोगों के खिलाफ गन्दी राजनीति करते हैं.
 
हिन्दुस्तान के जितने भी अपने आपको हिटलर समझ कर कर्मचारियों को सताते रहे हैं उनमें से एक भी ऐसा नहीं है जिसको मालिकों ने बेआबरू कर के बाहर का रास्ता ना दिखा दिया हो. हम लोग बीस साल से कम्पनी की काली करतूतों को देख रहे हैं. यह कम्पनी कभी किसी की नहीं हुई. ये लोग इसलिए भी इतना अत्याचार कर लेते हैं क्यूंकि कर्मचारियों में एकजुटता नहीं है जब कुछ कर्मचारियों को मैनेजमेंट रिजाइन के लिए कहता है तो वे रिजाइन करके चुपचाप घर चले जाते हैं. कभी किसी कानूनी में प़ड़े नहीं इसीलिए प्रबंधन अपने आपको तीसमार खां समझता है. लेकिन हम लोग अपने अधिकार की लड़ाई अकेले भी लड़ेंगे और इंसाफ मिलने तक हमारी जंग जारी रहेगी.
 
हिन्दुस्तान अपने ही कर्मचारियों ऊपर जिस गलत ढंग से कार्रवाई कर रहा है उससे पूरे देश में इसकी बदनामी हो रही है. हिन्दुस्तान के ऊपर आल इंडिया के लेबर कोर्ट में मुकदमें चल रहे हैं जिसमें उसे रोज फाइन पर फाइन भरने पड़ रहे हैं. यहां कानपुर में ही एक अनुचर और सेल्स एक्सक्यूटिव विजय यादव को जबरन निकालने का केस चल रहा है जिसमें उसकी खूब फजीहत हो रही है. हालत ये हो गई है कि मैनेजमेंट रूपये देकर मामला खत्म करना चाहता है. इन सबसे इसकी साख बहुत गिर रही है और कोई भी यहां नौकरी नहीं करना चाहता. उसका कारण ये है कि इस कम्पनी में किसी की एक दिन की भी नौकरी की गारण्टी नहीं है. सभी अधिकारियों में लूट मची है और मालिक सब जानकर भी अनजान बन रहे हैं
 
जब 1996 में हमने लखनऊ ज्वाइन किया था तो दिन-रात 16-16 घंटे काम करते थे कि अखबार चल जाये क्यूंकि इससे ही जीवन यापन होगा. मैनेजमेंट डिपार्टमेंट चेंज करके काम कराता था फिर भी हम खुशी-खुशी काम करते थे. कभी विरोध नहीं किया. 2001 में जब वाराणसी में लांचिंग हुआ तो वहां पूरी लगन और ईमानदारी से 16-16 घंटे काम किया. जब अखबार चल निकला तो शैतानों ने कम्पनी से बाहर कर दिया. ऐसे समय में जब हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं उनकी उच्च शिक्षा के लिए पैसों की सख्त जरूरत है प्रबंधन के ऐसा कर देने से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है. अब इस उम्र में कोई नौकरी भी नहीं दे रहा. आखिर जायें तो जायें कहां. अंततोगत्वा इनका मुनासिब इलाज करने में ही भलाई है.
 
आपका
 
संजय दूबे

संपर्क- 7275795755


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