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एवार्ड विनिंग प्रोग्राम है एबीपी न्यूज का ‘प्रधानमंत्री’

एबीपी न्यूज का कार्यक्रम -प्रधानमंत्री- शानदार है. एवॉर्ड विनिंग. मेरे ख्याल से आज देश के हर युवा और नई पीढ़ी के पत्रकारों को ये कार्यक्रम जरूर देखना चाहिए. जिस संजीदगी और बुनावट से प्रोग्राम में भारत की बदलती तस्वीर और घटनाओं को दिखाया-बताया गया है, वैसा आज से पहले किसी भी टेलिविजन प्रोग्राम में मैंने तो नहीं देखा. 
एबीपी न्यूज का कार्यक्रम -प्रधानमंत्री- शानदार है. एवॉर्ड विनिंग. मेरे ख्याल से आज देश के हर युवा और नई पीढ़ी के पत्रकारों को ये कार्यक्रम जरूर देखना चाहिए. जिस संजीदगी और बुनावट से प्रोग्राम में भारत की बदलती तस्वीर और घटनाओं को दिखाया-बताया गया है, वैसा आज से पहले किसी भी टेलिविजन प्रोग्राम में मैंने तो नहीं देखा. 
 
और कार्यक्रम में भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों तथा उनके समकालीन राजनीतिज्ञों-पत्रकारों-व्यक्तियों को दिखाने के लिए नाट्यरुपांतरण वास्ते जिन कलाकारों का चयन किया गया है, वह भी काबिले तारीफ है. एकदम सटीक. मुझे तो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चंद्रशेखर और लालकृष्ण आडवाणी को दिखाने के लिए चुने गए कलाकार शानदार लगे. शक्लें और भावभंगिमाएं असली पात्रों से काफी मिलती-जुलतीं. दूसरे पात्रों के लिए कलाकारों का चयन भी काफी अच्छा लगा. मैंने इस सीरीज के लगभग सभी एपिसोड देखे हैं और तभी ये बात बोल रहा हूं. आज नरसिम्हा राव-चंद्रशेखर पर केंद्रित कार्यक्रम में यादें ताजी हो गईं कि कैसे देश का सोना गिरवी रखा गया, वे क्या हालात थे, जिसके चलते नरसिम्हा राव को उदारीकरण की जमीन पर उतरना पड़ा, हर्षद मेहता ने उस जमाने में कैसे देश को 5 हजार करोड़ का चूना लगाया (उस जमाने में यह कितनी बड़ी रकम होगी, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि प्रधानमंत्री राव पर हर्षद ने 1 करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगाया था) और जैन हवाला कांड में कैसे पहली बार केद्रीय मंत्रियों-लालकृष्ण आडवाणी समेत कई राजनेता-टॉप ब्यूरोक्रेट फंसे थे. उनके खिलाफ एफआईआर हुई थी. लाजवाब. 
 
प्रधानमंत्री कार्यक्रम की जान हैं इसके सूत्रधार मशहूर डायरेक्टर और एक्टर शेखर कपूर. जिस शिद्दत और अंदाज में वह कहानी को पिरोते हैं और घटनाओं का जिक्र करते हैं, वह टीवी के मंजे हुए एंकरों के लिए किसी पाठशाला से कम नहीं. उन्हें देखना और सीखना चाहिए कि एंकरिंग का मतलब क्या होता है और प्रोग्राम की संवेदनशीलता कैसे बनाए रखी जाती है. यह प्रोग्राम भारतीय न्यूज टेलिविजन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा. और दूसरे न्यूज चैनलों के लिए एक चैलेंज कि वह भी कुछ ऐसा सोचकर दर्शकों को बांधे रखने लायक ऐसा कार्यक्रम बनाएं, जहां लाफ्टर-सनसनी ना होते हुए भी हर किसी को इसे देखने के लिए मजबूर कर दे.
 
एबीपी न्यूज के मुखिया शाजी जमा साहब, मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर और इस कार्यक्रम की पूरी टीम को बधाई. इतना शानदार-ज्ञानवर्धक कार्यक्रम बनाने के लिए. मुझे अंदाजा है कि बड़े स्केल पर बनाए गए इस कार्यक्रम की सफलता को लेकर कितनी माथापच्ची हुई होगी, खासकर तब, जब हिन्दी न्यूज चैनलों पर आज टीआरपी बोलती है. इस संदर्भ में एबीपी न्यूज को बहुत बड़ी वाली मुबारकबाद. इस उम्मीद के साथ कि बाकी के चैनलों पर भी हम दर्शकों को जल्द ऐसे ही शानदार कार्यक्रम देखने को मिलेंगे. जय हो.
 
तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.
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