सेवा में, प्रधान सम्पादक महोदय, भड़ास न्यूज, नई दिल्ली, महोदय, चुनाव आते ही गांव-गिरांव के रिपोर्टरों का खुलेआम उच्च पदाधिकारियों द्वारा शोषण शुरू हो जाता है। पिछले पांच साल तक गांव-गिरांव की खबरों को लिखते हुए जब अपने एमएलए और एमपी के बारे में लिखने का मौका आता है, तब वहां पर प्रदेश से लेकर जिला तक वरिष्ठ रिपोर्टरों की कलमें तेज हो जाती हैं।
पर सच्चाई यह है कि वे पत्रकार नेताओं के बारे में सुनी सुनाई बातें और अपने संबन्धों के मद्देनजर ही न्यूज बनाते हैं, यही नहीं वे अपने भविष्य को लेकर और नेताओं के संपर्कों के आधार पर खबर प्रकाशित करते हैं, जो छोटे और गांव कस्बों के रिपोर्टरों के हक पर खुलेआम डाका डालते हैं। हम अपने नेता के बारे में क्या पढ़ाना चाहते हैं उसे हम अच्छी तरह से व्यक्त कर सकते हैं, क्योंकि नेताजी के विषय में हमे सबसे अधिक ज्ञान होता है। लेकिन हमारे मीडिया के उच्चाधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं। इस समय अचानक नए-नए रिपोर्टरों की विभिन्न अखबरों और न्यूज चैनलों पर मनगढंत खबरें देखकर लगता है कि हमारे नेता को बाहरी रिपोर्टर अधिक जानते हैं और हम सब कम जानते हैं।
महोदय मैं भड़ास के माध्यम से बड़े और मछोले-छोटे सभी अखबार के वरिष्ठ संपादकों-मालिकों और सीईओ का ध्यान इस तरफ आकर्षित कराना चाहता हूं कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के बारे में क्षेत्रीय संवाददाताओं की लेखन को ही तरजीह दें। हां, यदि कुछ गलत हो तो उसे सुधारने के लिए वरिष्ठ लोगों को निर्देश दें यह तो ठीक होगा लेकिन जो जिनके विषय में नहीं जानते हैं, उनके बारे में खबर प्रकाशित कर क्षेत्रीय जनता के बीच हंसी का पात्र न बनें। यह देखा जा रहा है कि सभी बड़े अखबारों में इस बार पेड न्यूज को लेकर काफी गहमागहमी है। प्रशासन भी इस पर ध्यान दे रहा है लेकिन न्यूज कैसे, कहां और कब क्या छापनी है इसे रोक नहीं सकता है।
इस समय फैजाबाद और अयोध्या में एमएलए के विषय में लखनऊ से खबर छप रही है, वह आधी-अधूरी और तथ्यविहीन लगती है। ऐसे में न्यूज पेपर की छवि खराब होती है। मैं किसी भी न्यूज पेपर का नाम नहीं लिखना चाहता हूं क्योंकि सभी के यहां तहसील से लेकर ब्लाक तक के संवाददाताओं का शोषण हो रहा है। कृपया ऐसा होने से रोकते हुए मीडिया की निष्पक्षता को बनाए रखने में छोटे रिपोर्टरों की मदद करें।
कृष्ण कुमार
अयोध्या





