बाराबंकी। मायावती सरकार में मलाई काटकर केन्द्र में प्रति नियुक्ति पर दिल्ली गये आईएएस अनिल संत ने मनरेगा योजना में अपने फार्म हाउस के अंदर पक्की नहर का निर्माण करा लिया और दबंगई तो देखिए किसानों को नहीं लेने देते हैं और आस-पास की जमीनों पर अवैध कब्जा भी कर रखा है। इस संबंध में किसानों ने जब शिकायत की तो उच्चाधिकारी से लेकर मंत्री तक बोले कार्यवाही तो होगी लेकिन सब रहा ढाक के तीन पात।
मामला बाराबंकी के थाना सतरिख क्षेत्र में आने वाले प्रभावशाली आईएएस अनिल संत के तीरगांव स्थित फ़ार्म हाउस का है बसपा सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात अनिल संत ने पहले अवैध कमाई के चलते करोड़ों का फार्म हाउस खरीदा और इस फ़ार्म हाउस के लिए आखिरी छोर तक पानी पहुचाने के लिए कई किलोमीटर की नहर पक्की करवा ली और इस नहर को पक्का कराने में मनरेगा योजना का करीबन साढ़े छह करोड़ से अधिक का धन खर्च करवा दिया गया जिसमें न तो इलाके के लोगों को इस योजना में काम दिया गया और ना ही इस नहर से किसी किसान को अपने खेतों में पानी लगाने के इंतजाम किये गए। इतना ही नहीं इस फ़ार्म हाउस के आगे पानी ना जाए इसके लिए अनिल संत ने फ़ार्म हाउस के लिए नहर की आखिरी छोर पर एक पक्का बांध भी बनवा दिया जिससे वहां से आगे पानी न जा सके। पीड़ित शत्रोहन व सुन्दर आदि किसानों का आरोप है की नहर पर अनिल संत ने इसलिए बाँध लगवा दिया है जिससे उनके फ़ार्म हाउस में आसानी से पानी पहुंच सके किसानो ने अनिल संत पर आरोप लगाया की अगर कोई जुर्रत करता है तो उनके गार्ड बन्दूक लेकर दौड़ा लेते है।
नहर के पक्के निर्माण के तुरंत बाद ही तत्कालीन कमिश्नर फ़ैजाबाद राजीव सिंह भी निरीक्षण करने मौके पर भी पहुचे थे जिन्होंने नहर के आखिरी छोर तक आसानी से पानी पहुचाने के लिए मनरेगा योजना के तहत बाराबंकी में पहली बार इस काम को किए जाने की बात भी कही थी और इस काम की काफी तारीफ भी की थी। लोगो को ये नहीं पता था की आखिरकार उनका तारीफ करने का मकसद क्या था। उन्होंने तो ये भी कहा था की इस नहर के पक्की करण के बाद किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन हकीकत तो ये है कि उसके बाद से ही इलाकों के गरीब और कमजोर किसानों पर अनिल संत के लोग बराबर अत्याचार करने लगे नहर से अपने खेतो में पानी लगाने की रोक लगाने के साथ ही वहा के कई किसानो की जमीन पर भी अवैध कब्जे कर लोगों के बुजुर्गां के कब्रिस्तान को भी अपने फ़ार्म हाउस में मिला लिया इस फ़ार्म हाउस में घुसने की जुर्रत इलाके के किसी किसान की नहीं होती।
इस मामले पर प्रदेश सरकार के बाराबंकी विधायक सुरेश यादव व ग्राम विकास मंत्री अरविन्द गोप का कहना है कि उनकी जानकारी में अगर मनरेगा के पैसों का अनिल संत ने दुरूपयोग किया होगा तो वो कानूनी कार्यवाही करवाएंगे लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद ना तो वहां कोई अधिकारी जांच करने पहुंचा और ना ही अनिल संत जैसे प्रभावशाली आईएएस पर कोई कड़ी कार्रवाई की गई। इससे पहले भी इस मामले की जांच करने केंद्र सरकार के ग्राम विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने भी इस फ़ार्म हाउस पर पहुंच कर मामले की जांच की थी और इस कार्य में मनरेगा योजना के पैसों के दुरूपयोग की बात स्वीकार की थी और इस कार्य में उन्होंने बहुत बड़ी धांधली को भी स्वीकार किया था बाराबंकी के कांग्रेसी सांसद व एससी एसटी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीएल पुनिया के अनुसार इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार के ग्राम विकास मंत्री जय राम रमेश ने प्रदेश सरकार को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए पत्र लिखा था लेकिन प्रदेश सरकार ने अबतक इन धांधलियो पर चूं नहीं की। पुनिया ने कहा कि इस सम्बन्ध में जयराम रमेश ने राज्य सरकार को पत्र लिखा था कि इस मामले पर मुकदमा दर्ज करवाया जाए और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए लेकिन राज्य सरकार ने ना तो अभी तक मुकदमा दर्ज करवाया और ना ही सीबीआई से जांच कराने की मांग की।
मुख्य विकास अधिकारी बाराबंकी अविनाश कृष्ण से जब इस संबंध में पूछा गया कि मनरेगा योजना के तहत जिले में कितनी नहरों को पक्की किया गया है तो उनका कहना था कि नहरों को पक्की करने की क्या जरूरत है। जब उनसे बताया गया कि सतरिख में आईएएस अनिल संत के फार्म हाउस से निकलने वाली नहर पक्की कर दी गयी है और उसमें किसानों को पानी भी नहीं लेने दिया जा रहा है तो उन्होंने अनजान बनने की कोशिश की और कहा कि नहर आम जन के लिए होती है किसी की प्राइवेट प्रापर्टी नहीं। अगर ऐसा है तो गलत है मेरे संज्ञान में नहीं था मैं देखता हूं। प्रदेश सरकार द्वारा बसपा सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात इस आईएएस पर जांच की कार्यवाही की मांग के बाद भी कुछ न होना और किसानों का उत्पीड़न करना अवाम में चर्चा का विषय बना हुआ है। देखना यह है कि सपा सरकार बसपा के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय से तैनात आईएएस अनिल संत के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश करेगी या फिर बाबू सिंह कुशवाहा की तरह लीपा-पोती।
बाराबंकी से रिज़वान मुस्तफा की रिपोर्ट