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सहारा की अपने कर्मचारियों को निकालने के लिए परीक्षा

देहरादून। राष्ट्रीय सहारा ने अपने कर्मचारियों की छंटनी के लिए नये-नये तरीके खोज रखे हैं. आजकल सहारा अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई बनाने के नाम पर परीक्षा ले रहा है लेकिन साथ में ये है कि जो परीक्षा पास नहीं कर पायेंगे उन्हें प्रबंधन बाहर का रास्ता दिखा देगा. उस पर तुर्रा ये कि परीक्षा देनी सबको है. इस परीक्षा के लिए जो पास होने का मानक है वो सबके लिए एक जैसा है. चाहे वो क्लर्क हो या प्रोडक्शन में काम करने वाला कोई कर्मचारी सभी एक ही परीक्षा देंगे. अब ये भला कैसी परीक्षा है.
देहरादून। राष्ट्रीय सहारा ने अपने कर्मचारियों की छंटनी के लिए नये-नये तरीके खोज रखे हैं. आजकल सहारा अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई बनाने के नाम पर परीक्षा ले रहा है लेकिन साथ में ये है कि जो परीक्षा पास नहीं कर पायेंगे उन्हें प्रबंधन बाहर का रास्ता दिखा देगा. उस पर तुर्रा ये कि परीक्षा देनी सबको है. इस परीक्षा के लिए जो पास होने का मानक है वो सबके लिए एक जैसा है. चाहे वो क्लर्क हो या प्रोडक्शन में काम करने वाला कोई कर्मचारी सभी एक ही परीक्षा देंगे. अब ये भला कैसी परीक्षा है.
 
सहारा देहरादून ने इसी 26 अगस्त को अपने स्ट्रिंगरों को नियमित कर्मचारी के तौर पर शामिल करने के लिए परीक्षा करवाई थी लेकिन इस परीक्षा का मकसद इन स्टिंगरों की छंटनी करना था. कल परीक्षा के परिणाम से ये बात सामने आ गई जिसमें केवल एक स्टिंगर पास हुआ है. जबकि पचास से अधिक स्टिंगर परीक्षा में बैठे थे. केवल देहरादून में ही 25 स्टिंगर हैं जबकि परीक्षा में दूसरे प्रदेशों के भी स्टिंगर भी शामिल हुए थे. पास हुए इकलौते स्टिंगर शायद नोएडा के हैं
 
वैसे ये मैनेजमेंट का ये तरीका सबसे कारगर है क्यूंकि कोई कर्मचारी इस पर विरोध भी नहीं कर पायेगा. खबर है कि सहारा में अभी इस तरह से अस्थाई कर्मचारी निकाले जाने की तैयारी चल रही है. 14 फरवरी को फिर इसी तरह की एक परीक्षा होने वाली है. ये परीक्षा एडिटोरियल टीम में लेने के नाम पर ली जा रही है लेकिन होना वही है कि जो कर्मचारी नहीं पास कर पायेंगे उनकी छुट्टी तय है.
 
सहारा का अस्थाई स्टाफ इस कदम से बहुत घबराया हुआ है. सहारा के एक वरिष्ठ कर्मी ने भड़ास4मीडिया को फोन पर बताया कि "इस परीक्षा में कुछ पर स्थाई स्टाफ के लोग भी बैठे थे. उनका कहना था कि प्रबंधन ने परीक्षा के लिए सभी कर्मचारियों के लिए एक ही मानक बनाया है. अब ऐसा कैसे हो सकता है कि अलग-अलग योग्यता वाले व्यक्तियों के लिए एक ही मानक बना दिये जायें. इस कदम से सहारा से कई सारे कर्मी खुद ही सहारा छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं."
 

 

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