कोलकाता : आजकल हर कोई जब किसी भी गलत गतिविधि में फंसता है तो मामले को राजनीतिक रंग देकर बचने की कोशिश करता है चाहे आसाराम हो या तरुण तेजपाल. आज इसी कड़ी में सहारा प्रमुख सु्ब्रत रॉय का नाम भी आ गया है. सुब्रत रॉय ने कोलकाता में आज कहा कि उन्हें राजनीतिक कारणों से परेशान किया जा रहा है. सोनिया गांधी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा है कि मैं एक भावुक व्यक्ति हूं. मैने प्रधानमंत्री पद के लिए विदेशी मूल का मुद्दा उठाया था और किसी भारतीय के ही पीएम होने की बात की थी जिसकी कीमत मेरी कम्पनी को चुकानी पड़ रही है.
उन्होंने कहा कि आज के दौर में कोई उद्योगपति उभर नहीं सकता. मैने तीस साल पहले काम शुरू किया था और मैने सफलता अर्जित की लेकिन आज के दौर में मैं कुछ नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि सेबी का व्यवहार उनके साथ ऐसा नहीं है जैसा दूसरी कम्पनियों के साथ और इसकी वजह राजनैतिक है.
रॉय ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने जा रहे हैं कि ऐसे हालात में हम अपने दस्तावेज सेबी के बजाय राष्ट्रीयकृत बैंकों को सौंपना चाहते हैं. उत्तराधिकार के मुद्दे पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भविष्य में कम्पनी ट्रस्ट द्वारा संचालित करेगी.
जब उनसे पूछा गया कि कम्पनी की छवि खराब हो रही है तो उन्होंने कहा कि हमारे लिए देनदारी कोई बड़ी चिन्ता की बात नहीं हैं. हमें बैंकों और देनदारों को कुल चालीस से पैंतालीस हजार करोड़ ही देने हैं जबकि चल व अचल सम्पत्तियों की कीमत एक लाख बीस हजार करोड़ रूपये है.