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लखनऊ

एक था तहलका

देश की सबसे धारदार मैगजीन के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल अपनी एक गलती के कारण सबसे बड़ी परेशानी में फंस गये हैं। सिर्फ उनकी विरोधी पार्टी भाजपा ही नहीं बल्कि मीडिया के लोग भी उन पर जबरदस्त तरीके से हमला कर रहे हैं। सबको लग रहा है कि तहलका को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। जाहिर है सबकी कोशिश है कि किसी भी तरह तहलका को खत्म किया जाए या उसकी विश्वसनीयता को ही तार-तार कर दिया जाए। देखना यह है कि इतने हमले झेलने के बाद क्या तहलका संस्थान बचेगा या फिर उसकी धारदार पत्रकारिता अब अतीत का हिस्सा बन जाएगी।
देश की सबसे धारदार मैगजीन के एडिटर इन चीफ तरुण तेजपाल अपनी एक गलती के कारण सबसे बड़ी परेशानी में फंस गये हैं। सिर्फ उनकी विरोधी पार्टी भाजपा ही नहीं बल्कि मीडिया के लोग भी उन पर जबरदस्त तरीके से हमला कर रहे हैं। सबको लग रहा है कि तहलका को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। जाहिर है सबकी कोशिश है कि किसी भी तरह तहलका को खत्म किया जाए या उसकी विश्वसनीयता को ही तार-तार कर दिया जाए। देखना यह है कि इतने हमले झेलने के बाद क्या तहलका संस्थान बचेगा या फिर उसकी धारदार पत्रकारिता अब अतीत का हिस्सा बन जाएगी।
 
तरुण तेजपाल की गिनती वर्षों से देश के सबसे ताकतवर पत्रकार के रूप में होती रही है। तहलका ने उस समय देश भर में तहलका मचा दिया था जब एनडीए के शासनकाल में उसके एक स्टिंग आपरेशन में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण फंस गये थे। बंगारू हथियारों के एक फर्जी सौदे में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए कैमरे पर देश भर में दिखायी दिये। भारी हंगामे के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को न सिर्फ इस्तीफा देना पड़ा बल्कि कई महीने जेल में भी रहना पड़ा।
 
मगर तहलका का यह अंतिम हमला ही नहीं था। कारगिल शहीदों के लिए मंगाये जा रहे ताबूतों में भी कमीशन लेने की बात तहलका सामने लाया और तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडिज को इस्तीफा देना पड़ गया था।
 
हिन्दुस्तान में यह पहली बार हुआ था कि किसी मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के चलते सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष को जेल तक का सफर तय करना पड़ा हो और उसके रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा हो। भाजपा तहलका की टीम से तिलमिला गई थी। सरकार के इशारे पर तहलका से जुड़े कई लोगों की घेराबंदी करने के लिए कई प्रकार की साजिशें रची गयीं मगर कामयाबी नहीं मिल सकी। पिछले दिनों गुजरात दंगों का सच जानने के लिए तहलका ने फिर स्टिंग आपरेशन किया और साबित कर दिया कि यह दंगे सरकार द्वारा प्रायोजित थे। पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी के जहरीले भाषणों का मामला भी खत्म हो जाता अगर तहलका इस मामले की तह तक जाकर पड़ताल न करता। स्वाभाविक था कि तहलका के यह हमले भाजपा का वह चेहरा सबके सामने ला रहे थे जिन्हें भाजपा हमेशा छिपाना चाहती है। लिहाजा भारतीय जनता पार्टी मौका ढूंढ़ रही थी जिससे तहलका को ठिकाने लगाया जा सके। तरूण तेजपाल इतनी आसानी से यह मौका दे देंगे इसकी कल्पना भाजपा ने भी कभी नहीं की थी। गोवा में एक सम्मेलन के दौरान तरूण तेजपाल अपनी बेटी की उम्र की युवती के साथ वह हरकत कर बैठे जिसका पछतावा शायद उन्हें जिंदगी भर रहेगा। तरूण तेजपाल ने अपनी महिला सहकर्मी के साथ दो बार यौन शोषण करने की कोशिश की।
 
महिला ने इसका तीखा विरोध किया। उसने तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी को मेल लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी। शुरूआती दौर में तो शोमा चौधरी और तेजपाल ने मामले को दबाने की कोशिश की मगर मामले ने तूल पकड़ लिया। बड़े-बड़े मीडिया संस्थान भी तरूण तेजपाल पर जबरदस्त हमला करने में जुट गये। दरअसल तहलका ने देश के कई बड़े पूंजीपतियों और सरकार के गठजोड़ पर हमला किया था। कारपोरेट जगत के लोग तहलका को मैनेज नहीं कर पा रहे थे। लिहाजा वह भी तेजपाल को सबक सिखाना चाह रहे थे। मीडिया जगत के कई बड़े नाम ऐसे भी थे जो तेजपाल की प्रसिद्धी से खासा चिढ़ते थे। इन मीडिया संस्थानों को यह डर था कि अगर तरूण तेजपाल की यही रफ्तार रही तो कभी न कभी तहलका कारपोरेट जगत से उनके रिश्ते से जुड़ी कोई स्टोरी कर सकता है। लिहाजा लगभग सभी बड़े मीडिया संस्थान तेजपाल के ऊपर भंयकर हमला करने में जुट गये।
 
हालांकि कुछ सोशल साइट पर इस खेल का भी खुलासा हुआ। भड़ास4मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह ने अपनी साइट पर न सिर्फ यह खबरें लगाईं बल्कि कई रिपोर्ट छापी जिससे साबित हुआ कि किस तरह तेजपाल को घेरने की कोशिशें की जा रही हैं। जाहिर है आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज होगा।
 
लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और वीकएंड टाइम्स हिंदी वीकली के संपादक हैं.  यह स्टोरी वीकएंड टाइम्स में प्रकाशित हो चुकी है.

संजय के अन्य लेखों, विश्लेषणों, रिपोर्टों को पढ़ने के लिए क्लिक करें: भड़ास पर संजय
 

 

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