Tara Shanker : आप हों या न हों, मैं तो हूँ फैन! मल्लिका शेहरावत, बिपाशा बासु, सनी लियोन जैसी महिलाओं का! उनकी अदाकारी के लिए उतना नहीं जितना कि उनकी ख़ुद्दारी, निर्भीकता और आज़ाद ख़याली का! बहुत गुस्सा आता है जब हमारा कुंठित समाज उनका मजाक उड़ाता रहता है- कवि सम्मेलनों में, टीवी के हास्य कार्यक्रमों में! उनके नाम पे हज़ारों misogynist jokes और चुटकुले बनाये जाते हैं….शर्म आनी चाहिए इस महिलाविरोधी समाज को!
आज जिस तरह से बॉलीवुड़ में हीरोइनों को मसाला और आइटम के रूप में पेश किया जाता, या टीवी advertisements में उन्हें सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में पेश किया जाता है, वो निंदनीय है! निंदनीय इसलिए भी कि यही बॉलीवुड और टीवी चैनेल महिलाओं के लिए कम ही जगह छोड़ते हैं जीविका चलाने के लिए, पुरुषों की अपेक्षा बहुत कम मेहनताना दिया जाता है तब कोई कुछ नहीं बोलता लेकिन जैसे ही वही हीरोइनें/लडकियां जब खुद के पैरों पे खड़े होने के लिए अपने शरीर से सम्बंधित हर निर्णय लेने लगतीं हैं तो यही misogynist समाज उन्हें फूहड़, चरित्रहीन कहता है!
आइटम गानों का खूब मजा लेता है ये समाज लेकिन उसी गाने के लिए हीरोइनों को असभ्य और फूहड़ भी कहता है!
Male chauvinism down! down!
मल्लिका शेहरावत को सलाम! एक बेबाक और स्वाभिमानी महिला के रूप में मेरी नज़र में उनके लिए इज्जत अब और बढ़ गयी! नीचे संलग्न विडियो देखिये और कमेंट करिए:
http://www.youtube.com/watch?v=kHSikgTOz70
तारा शंकर के फेसबुक वॉल से. तारा शंकर यूपी के जिला बस्ती के रहने वाले हैं और इन दिनों जेएनयू के अध्ययनरत हैं. वे सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर अपने प्रखर विचार और तेवर के लिए जाने जाते हैं.





