पटना के एक आलीशान होटल पाटलिपुत्र में इन दिनों एक प्रदर्शनी चल रही है। इस प्रदर्शनी का श्रेय स्वयं को सबसे बड़ा अखबार कहने वाले दैनिक हिन्दुस्तान को जाता है। इस प्रदर्शनी का शीर्षक है – “डेस्टिनेशन दिल्ली”। इस प्रदर्शनी के जरिए लोगों को बताया जा रहा है कि अब बिहार के लोग भी दिल्ली में अपना घर होने के सपने को साकार कर सकते हैं। हिन्दुस्तान अखबार की ओर से प्रदर्शनी को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली अर्पिता ने बताया कि उनका अखबार पिछले 5 वर्षों से इस तरह का आयोजन कर रहा है। अब तो यह इतना लोकप्रिय और सफ़ल रहा है कि हर साल इसे 4 बार आयोजित किया जाता है।
अर्पिता ने यह भी बताया कि अब प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बिल्डरों की संख्या और उनके स्तर में भी बदलाव आया है। बड़ी संख्या में बिहार के अमीर दिल्ली और एनसीआर के इलाके में अपना आशियाना खरीद रहे हैं। आशियाना के अलावा बड़ी संख्या में लोग प्लाट भी खरीद रहे हैं। इसके अलावा व्यावसायिक उद्देश्यों से लोग शापिंग माल में भी बुकिंग करवा रहे हैं। अर्पिता का यह भी मानना है कि बिहारवासी समृद्ध हुए हैं और इस कारण लोगों की क्रय शक्ति बढी है।
वही इस मामले में एक सच्चाई यह है कि प्रदर्शनी में भाग लेने वाली कंपनियों द्वारा जो रेट बताया जा रहा है वह दिल्ली में वास्तविक मूल्य से डेढ गुना और कई मामलों में तो दोगुणे से भी अधिक है। कंपनियों द्वारा लोगों को ठगने और बेवकूफ़ बनाने के लिए तमाम तरह के झांसे दिये जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन सबके बावजूद खरीदारों की कोई कमी नहीं है।
प्रदर्शनी में भाग ले रहे आम्रपाली कम्पनी के प्रतिनिधि ने बताया कि दिल्ली का रियल एस्टेट बिजनेस बिहार के कारण ही चल रहा है। उसने यह भी बताया कि उसकी कंपनी बिहारियों में बहुत लोकप्रिय है और उसकी कंपनी के जरिए हर वर्ष कम से कम 500 करोड़ रुपए तक का निवेश बिहार के लोग दिल्ली एवं एनसीआर के इलाके में करते हैं। अनुमान के तौर पर उसने बताया कि दिल्ली का रियल इस्टेट कारोबार कम से कम 10000 करोड़ रुपए है और इसमें सबसे अधिक भागीदारी बिहारियों की है।
बहरहाल, सवाल उठता है कि वह बिहार जिसके लिए राज्य सरकार के मुखिया सूबे में निवेश को बढावा देने के नाम पर विशेष राज्य का दर्जा मांगने की राजनीतिक मुहिम चला रहे हैं, उसी राज्य के लोग दिल्ली सहित सभी मेट्रो शहरों में निवेश कैसे कर रहे हैं। आखिर उनके पास इतनी संपत्ति कैसे आयी। यह शोध का विषय है कि बिहार की अर्थव्यवस्था में यह कायापलट कैसे हो गया। वैसे इस पूरे आयोजन के लिए दैनिक हिन्दुस्तान को बधाई देना जरूरी है क्योंकि उसके जरिए दिल्ली के बिल्डर बड़ी आसानी से बिहार के लोगों को न केवल बेवकूफ़ बना रहे हैं, बल्कि उन्हें लूट भी रहे हैं।
लेखक नवल कुमार बिहार के युवा, बेबाक और तेजतर्रार पत्रकार हैं. वे बिहार केंद्रित वेब पोर्टल 'अपना बिहार डाट ओआरजी' के संस्थापक और संपादक हैं.






