Vimal Kumar : कल मेरी शादी के 25 साल हो जायेंगे. मेरी शादी पटना में हुई थी. प्रयाग जी, विष्णु नागर, असद जैदी, इब्बार रब्बी, रामकृष्ण पाण्डेय, राजेश वर्मा चंद्रप्रकाश झा सुमन, अमिताभ, नीलाभ मिश्र, कुमार रंजन दिल्ली से गए. उदयप्रकाश जी और मंगलेश जी नहीं जा सके. जब मुझे लगा की दिल्ली में कोई मुझसे प्रेम विवाह नहीं करेगा तो मैंने अरैंज्ड शादी की. बेरोजगारी के दिनों में वैसे भी कोई प्रेम करता नहीं. तब मेरी 1700 रुपये की नौकरी लगी थी. एक कमरे के मकान में रहता था, मयूर विहार हिंदुस्तान टाइम्स के अपार्टमेंट में.
पत्नी की नौकरी के कारण ही मैं दिल्ली में घर बना पाया, दो मंजिला. पत्नी का काफी योगदान रहा. उन्होंने मेरी काफी मदद की. पर हमारे बीच काफी झगड़े भी हुए. अक्सर गलती मेरी ही होती थी, क्योंकि ऊँची आवाज़ में बोलने की मेरी आदत है पर दो मिनट में मेरा गुस्सा शांत हो जाता है लेकिन उन्हें अपनी आलोचना भी बुरी लगती है. फिर भी मैं उनसे माफी मांग लेता हूँ.. मैं उनको वहीदा रहमान और नूतन बनाना चाहता था. पर वो नहीं बनीं.
वो इतनी परिपक्व हैं कि घर के कामकाज में उनका रोमांस ही मर गया. वो मेरी दोस्त तो बनीं पर मेरी प्रेमिका नहीं बन पायीं. मैंने 'खोयी हुई पत्नी', फिर 'मरी हुई पत्नी से प्यार' और 'मैं ही हत्यारा हूँ अपनी पत्नी का' नामक कविता भी लिखी. मैं थोड़ा भटका भी तो पत्नी ने कहा- कोई नहीं मिलेगी, मैं ही आपका ख्याल रखूँगी. मेरी पत्नी बहुत इमानदार सच्ची है पर थोड़ी जिद्दी हैं और रुठ जाती हैं.
मैंने 25 साल में कई साल उन्हें मनाने में बिताए पर उन्होंने मुझे आज तक दो एक बार ही मनाया. कई बार हम दोनों की आँखों में आंसू भी आये पर इसी तरह 25 साल गुजर गए. मेरी पत्नी महत्वाकांक्षी नहीं हैं. उनके पिता भी नहीं थे जबकी वे एक बहुत बड़े नामी गिरामी परिवार से हैं. मुझे इस बात की शिकायत रही कि उन्हें कुछ महत्वाकांक्षी भी होना चाहिए. पर अब मेरे भीतर भी महत्वाकांक्ष नहीं रही. वो कहती हैं कि जब हर साल विवाह की सालगिरह नहीं मनाई तो अब क्या मनाएं. निम्न मध्यवर्ग में इमानदारी से जीवन जीने पर और आर्थिक संघर्ष के कारण हम लोग अपनी पत्नियों का ख्याल रख नहीं पाते और वो असमय बूढी हो जाती हैं. ये जिन्दगी इसी तरह चलती है. अब कुछ दिन बचे हैं, किसी तरह काटने हैं. यही हम सबके जीवन की कहानी है.
वरिष्ठ पत्रकार और कवि विमल कुमार के फेसबुक वॉल से.





