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एबीपी न्यूज के कार्यक्रम में केजरीवाल के सामने शीला और हर्षवर्धन के तर्क ठहर नहीं पाए

Nadim S. Akhter : एबीपी न्यूज के कार्यक्रम में केजरीवाल के सामने शीला और हर्षवर्धन के तर्क ठहर नहीं पाए. एबीपी न्यूज ने दिल्ली चुनाव स्पेशल पर अभी एक तगड़ा कार्यक्रम दिखाया. इसमें एक-एक करके अलग-अलग मुद्दों पर सीएम पद के तीनों कैंडिडेट, अरविंद केजरीवाल, शीला दीक्षित और हर्षवर्धन की राय दिखाई गई. दरअसल एबीपी न्यूज की टीम ने इसके लिए अलग से मेहनत नहीं की, बल्कि पके-पकाए माल को compile करके एक साथ परोस दिया लेकिन दर्शकों के लिए ये एक बहुत फायदे का साबित हुआ. इस कार्यक्रम को देखने वाले दर्शक कम से कम एक जगह-एक साथ तीनों कैंडिडेट्स की राय देखकर ये मन बना पाएंगे कि वोट किसे देना है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या फिर बीजेपी. बहुत अच्छा प्रोग्राम था.

Nadim S. Akhter : एबीपी न्यूज के कार्यक्रम में केजरीवाल के सामने शीला और हर्षवर्धन के तर्क ठहर नहीं पाए. एबीपी न्यूज ने दिल्ली चुनाव स्पेशल पर अभी एक तगड़ा कार्यक्रम दिखाया. इसमें एक-एक करके अलग-अलग मुद्दों पर सीएम पद के तीनों कैंडिडेट, अरविंद केजरीवाल, शीला दीक्षित और हर्षवर्धन की राय दिखाई गई. दरअसल एबीपी न्यूज की टीम ने इसके लिए अलग से मेहनत नहीं की, बल्कि पके-पकाए माल को compile करके एक साथ परोस दिया लेकिन दर्शकों के लिए ये एक बहुत फायदे का साबित हुआ. इस कार्यक्रम को देखने वाले दर्शक कम से कम एक जगह-एक साथ तीनों कैंडिडेट्स की राय देखकर ये मन बना पाएंगे कि वोट किसे देना है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या फिर बीजेपी. बहुत अच्छा प्रोग्राम था.

एबीपी न्यूज ने चुनावों के मद्देनजर एक कार्यक्रम शुरु किया था- घोषणापत्र. इसमें एक नेता को बुलाकर समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों (ज्यादातर पत्रकार) से सवाल करवाए जाते हैं कि उनकी पार्टी का आगे क्या एजेंडा होगा. इसी प्रोग्राम में अलग-अलग दिन शीला दीक्षित, अरविंद केजरीवाल और डॉ. हर्षवर्धन भी आए थे, जिसमें तीनों ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखी थी. आज एबीपी न्यूज ने उनकी राय को एक जगह compile करके दर्शकों को दिखाया कि देखिए, बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर तीनों के अलग-अलग क्या विजन है, क्या planning है और क्या सोच है. इससे बतौर एक दर्शक मुझे भी समझने में आसानी हुई कि फलां मुद्दे पर किस पार्टी की सोच अच्छी या बेहतर है.

ईमानदारी से कहूं तो शीला दीक्षित ने निराश किया. उनके पास कोई जवाब नहीं था. 15 साल तक आप दिल्ली पर राज करोगे तो बता ही दोगे ना कि फलां एक काम कर दिया है. सो शीला सिर्फ वही गिनाती रही. उनके पास भविष्य का कोई खाका नहीं था. बीजेपी के हर्षवर्धन ने भी निराश किया क्योंकि ज्यादातर समय वह कांग्रेस की कमियां गिनाते नजर आए. उनकी कुछ बातें ठीक लगीं लेकिन दम नहीं था. बातों से वह ईमानदारी नहीं झलकी, लगा कि बस रटा-रटाया टाइप बोलना है, सो बोल दिया.

चुनाव में झाड़ू मार्का वाले अरविंद केजरीवाल की बातों में साफगोई दिखी. बिजली के दाम क्यों और कैसे बढ़े, बिजली कंपनियों का ऑडिट क्यों नहीं कराती शीला सरकार, कैसे 1000 करोड़ का पानी माफिया दिल्ली में काम कर रहा है, जैसी बातों से उन्होंने दिल जीत लिया. लगा कि पूरी तैयारी के साथ आए थे बात करने को. उनके पास विजन भी दिखा कि अगर हम कह रहे हैं कि ये काम करके दिखाएंगे तो बताया भी कि कैसे करेंगे. वैसे नहीं कि सोनिया गांधी की तरह Food security bill ले आए लेकिन इसके लिए पैसा कहां से आएगा, ये सरकार में किसी को नहीं पता. ना पीएम को और ना पीसी को.

सो भाई लोगों, अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी हमें भा रही है. उम्मीद है कि अगर जनता ने मौका दिया तो ये कुछ काम करके दिखाएंगे, जैसा कि ये बोल रहे हैं. वैसे भी कांग्रेस और बीजेपी से पब्लिक को ज्यादा उम्मीद नहीं है क्योंकि इन्हें वह कई बार आजमा चुकी है और नतीजा सिफर ही रहा है. आप अपने इलाके के विधायकों को मिलने वाले पैसे की रिपोर्ट उठा कर देख लीजिए. पब्लिक के काम करने के लिए इन्हें जो फंड मिलता है, ज्यादातर ने उसका ठीक से इस्तेमाल ही नहीं किया है. पैसा खजाने में बेकार पड़ा है और पब्लिक परेशानियों से जूझ रही है. वाह विधायक जी. बहुत उल्लू बना लिया हमें. अब हम आप लोगों को दिन में तारे दिखाएंगे. बस 4 तारीख का इंतजार है. दिल्ली की पूरी जनता को. अपना वोट जरूर डालिएगा और कुछ समझ ना आए कि कौन अच्छा है तो अपना वोट बर्बाद करने से बेहतर ये होगा कि None of the Above यानी NOTA ऑप्शन को चुन कर अपनी राय जरूर दर्ज करिएगा. अपना वोट बर्बाद मत कीजिएगा. वोट दीजिए, अपनी तकदीर बदलिए. बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है. आपका एक वोट इस देश के लिए बहुत कीमती है.

तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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