एनडीटीवी व वेदांता के गठजोड़ से इन दिनों बेटी बचाओ अभियान चल रहा है..(शायद कारपोरेट सोशल रिस्पोंसबिलिटी एक्ट की खानापूर्ति के वास्ते)..एनडीटीवी के चिकने चमकदार मंच पर एक दिन के लिए लायी गयी यह बेटियां, प्रियंका चोपड़ा व काजोल के बीच बैठी हुई हैं. अपने वालीवुड़ी अंदाज में प्रियंका उनसे उनके दुखड़े पूछ रही….
असल मुद्दे की बात करें तो गौर कीजिये कि कौन हैं यह बेटियां? या तो अनाथ या गरीबी की मारी, कम उम्र में अपनी माँ संग घरों में काम करने वाली, कोइ विकलांग, कोइ कुपोषित कोई स्कूलों से वंचित… कुल मिलाकर यह बेटियाँ समाज के उस विशाल श्रमिक तबके की बेटियां हैं जिनके माता-पिता इन्हीं वेदांता जैसी कंपनियों/ फैक्ट्रियों में बारह बारह घंटा अपना श्रम बेच रहे हैं.
मामूली दिहाड़ी व अपना हाड मॉस एक करने के एवज में…जो कम्पनियाँ अपने कामगारों को उनके श्रम का वाजिब मूल्य (हक़) नहीं दे रही उनके लिए सोशल जिम्मेदारी जैसा कोई कानून बनाना एक ढकोसला भर ही होगा.. अच्छा होता की एनडीटीवी इसके बजाय इन बेटियों के हालातों के इनसाईड जाके कोई स्टोरी करता, वेदांता जैसी कंपनियों के श्रम उल्लंघनों की बखिया उधेड़ता…..क्या होगा आखिरकार इन चेरेटिबल अभियानों से…
पत्रकार सुनीता भास्कर के फेसबुक वॉल से.





