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मध्य प्रदेश

एक ऐसा गांव जहां आज भी लोग आने-जाने और शादी करने से घबराते हैं

सीहोर : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के आष्‍टा विकासखंड के पगारियाचोर गांव में कुछ साल पहले एड्स से पांच व्यक्तियों की मौत हो गई थी. लेकिन सालों बीतने के बाद, आज भी लोग इस गांव में आने-जाने और शादी करने से घबराते हैं. मध्यप्रदेश में एड्स एवं एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या एक चिंतनीय पहलू तो है ही, साथ ही प्रदेश में एड्स पीड़ित परिवारों की उपेक्षा भी चिंता का सबब बन चुका है.
सीहोर : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के आष्‍टा विकासखंड के पगारियाचोर गांव में कुछ साल पहले एड्स से पांच व्यक्तियों की मौत हो गई थी. लेकिन सालों बीतने के बाद, आज भी लोग इस गांव में आने-जाने और शादी करने से घबराते हैं. मध्यप्रदेश में एड्स एवं एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या एक चिंतनीय पहलू तो है ही, साथ ही प्रदेश में एड्स पीड़ित परिवारों की उपेक्षा भी चिंता का सबब बन चुका है.
 
सीहोर की आष्टा तहसील से लगभग 10 मिलोमीटर दूर इस गांव में कुछ साल पहले एक ही साल में लगातार एड्स से 5 मौत के बाद यह गांव सुर्खियों में आ गया था. जिसके बाद यह गांव दूर-दूर तक एड्स वाले गांव के नाम से मशहूर हो गया. हमारी टीम जब इस बात की तफ्तीश करने इस गांव गयी तो इस गांव में भी सामान्य गांव की ही तरह माहौल था। दिन भर खेत से कम कर घर को लौटते लोग, चौपाल पर बैठे बुड्ढे, जवान और बच्चों की टोलियां. हमने चौपाल पर बैठे कुछ गांव के रहने वालों से इस बारे में बात की. पगारिया गांव के एक ग्रामीण ने हमें बताया कि गांव में एक ही साल में पांच लोगों की एड्स से मौत हो गई थी. 
 
गांव में हमारी टीम उन परिवारों से मिली जिनके परिवार के सदस्य एड्स जैसी भयंकर बीमारी से मार गए थे. गांव के ही एक लड़का हमें उन परिवारों के पास ले गया जिन्हें एड्स हुआ था. गलियों से हो कर जब हम चन्दर सिंह के परिवार से मिले. 30 से 35 साल के चन्दरसिंह की कुछ साल पहले एड्स से मौत हो गयी थी. चन्दर पेशे से ड्राइवर था. चन्दर की बहन और जीजा ने बताया कि चन्दर की मौत के बाद उसको और उसके पूरे परिवार को लोग शक की निगाह से देखते हैं.
 
गांव के ही दौलत सिंह धनवाल ने हमसे बातचीत में कहा कि दूसरे गांव के लोग हमसे कहते हैं कि यह एड्स वाले पगारिया गांव के हैं इनसे दूर ही रहना. ये सुनकर बड़ा दुख होता था. लोग इस गांव के बच्चों महिलाओं को भी शक की निगाह से देखते हैं. हमारे गांव में शादी करने से घबराते हैं
 
हमने इसी गांव के कुछ अन्य सदस्यों से बात की जिनके परिवार में एड्स से मौत हुई थी. सुमित्रा बाई ऐसे ही एक परिवार से हैं. उन्होंने बताया कि जब गांव में एड्स से कई लोगों की मौत हुई तो लोग घबराने लगे थे लेकिन अब स्थिति कुछ सामान्य है.
 
इस गांव के सरपंच के पति कृपा राम मितवाल ने भी इस बात को माना कि एड्स के कारण उनका गांव दूर-दूर तक बदनाम हो गया है. एड्स के कारण चर्चा में आ जाने के कारण दूसरे गांवों के लोग इस गांव में शादी-ब्याह करने से भी कतराते हैं. जब कई मौतें हुईं थी तो एक बार चेक अप शिविर लगा था. उसके बाद से कोई एड्स शिविर भी नहीं लगा. यहां तक कि विश्व एड्स दिवस पर भी कोई कार्यक्रम नहीं हुआ.
 
एड्स पीड़ित परिवारों के सदस्यों से बातचीत करने से पता चला कि उनके परिवार के कमाऊ सदस्य की मौत के बाद वे बदहाली में जीवनयापन कर रहे हैं. ऐसे परिवारों को उपेक्षित छोड़ने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में लाने के लगातार प्रयास करने, सुख सुविधाएं मुहैया कराने और उनकी आजीविका के लिए स्थाई व्यवस्था करने की जरूरत है पर ऐसे मामले में अधिकांशतः बच्चों और महिलाओं के प्रभावित होने के बावजूज उन्हें उपेक्षित जीवनयापन करना पड़ रहा है.
 
एड्स पीड़ित परिवार के बच्चे एवं महिलाएं दूसरों की गलतियों का खामियाजा भुगत कर समाज से बहिष्कृत न होने पाए, इस पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि जिन लोगों की मौत हुई थी, वे ट्रक ड्राइवर थे। लगभग दो हजार की आबादी वाले इस गांव में आज भी कई लोग ट्रक ड्राइवर हैं, इसलिए इस गांव में नियमित जांच शिविर की आवश्यकता थी, पर ऐसा नहीं किया जा रहा है। यद्यपि गांव के ही एक युवा ने बताया कि वह भी ट्रक चलाता है पर गांव में एड्स से हुई मौत के बाद लोगों में जागरूकता आई है और वे गलत कार्य नहीं करते। पिछले साल इस गांव में जब एड्स से लगातार मौत हुई थी तब स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था और कई लोगों के रक्त के नमूनों की जांच की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों को उनकी जांच रिपोर्ट नहीं दी गई थी। यदि इस गांव में कोई व्यक्ति संक्रमित है, तो उसकी निगरानी किए जाने की जरूरत है पर ऐसा नहीं हो रहा है। 
 
मध्य प्रदेश, सीहोर से आमिर खान की रिपोर्ट 
संपर्क- 08103261623
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