छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले नक्सली अब पत्रकारों पर हमला कर मौत के घाट उतार रहे हैं. छत्तीसगढ के धुर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नक्सलियों ने वरिष्ठ पत्रकार साई रेड्डी की हत्या कर दी. इस हत्या के बाद छत्तीसगढ़ में हड़कंप मचा हुआ है. नक्सलियों ने कुछ समय पहले एक पत्रकार नेमीचंद जैन की भी हत्या की थी. दंतेवाड़ा जिले के पत्रकार नेमीनंद जैन की हत्या की जिम्मेदारी लेने के बाद उस समय नक्सलियों ने जैन के परिवार और मीडिया से मांफी मांगी थी.
अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ नक्सलियों के निशाने पर हैं. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के वरिष्ठ पत्रकार साईं रेड्डी की शुक्रवार की दोपहर बासागुड़ा के साप्ताहिक बाजार में नक्सलियों ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी. पत्रकार साई रेड्डी शुक्रवार की सबुह बासागुड़ा साप्ताहिक बाजार गए हुए थे. वह अपने जीजा सत्यनारायण रेड्डी के घर के आंगन में बैठा हुए थे. इस दौरान पहले 4-5 नक्सलियों ने उन पर चाकू और फरसा से वार कर दिया. नक्सलियों से बचने के लिए वे भागते रहे. इसी दौरान नक्सलियों के संघम सदस्यों ने उन्हें फिर से घेर लिया और ताबड़तोड़ एक के बाद एक हमले करने लगे. उनके जीजा ने तत्काल संजीवनी 108 को फोन किया. जैसे ही उन्हें एम्बुलेंस में चढ़ाया गया उनकी मौत हो गई. साई रेड्डी पर पहले भी नक्सलियों के हमले हो चुके हैं. पूर्व में उनके गांव बासागुड़ा स्थित घर को नक्सलियों ने आग के हवाले कर उन्हें घर से खदेड़ा था. उनकी हत्या का फरमान भी जारी कर दिया था. इसके बाद वे बीजापुर में आकर समचार पत्रों में पत्रकार के रूप में कार्य कर रहे थे. वे समाचार संकलन के लिए ही बासागुड़ा गए हुए थे. इस दौरान नक्सलियों को उनके आने की भनक लगी और घटना को अंजाम दे दिया. पूर्व में साईं रेड्डी को नक्सली सहयोगी होने के आरोप में सजा हुई थी और वे जेल में भी थे. घटना को बासागुड़ा दलम के नक्सलियों ने अंजाम दिया.
नक्सलियों ने कुछ समय पहले एक पत्रकार नेमीचंद जैन की भी हत्या की थी. दंतेवाड़ा जिले के पत्रकार नेमीनंद जैन की हत्या की जिम्मेदारी लेने के बाद उस समय नक्सलियों ने जैन के परिवार और मीडिया से मांफी मांगी थी. इस बारे में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी दक्षिण रीजनल कमेटी के सचिव गणेश उइके ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर खेद जताया था. विज्ञप्ति में कहा गया था कि पत्रकार नेमीचंद जैन पर पुलिस मुखबिरी के आरोप लगे थे. लेकिन हमारे निचले स्तर के सदस्यों ने आरोप की जांच पड़ताल नहीं की और पार्टी नीतियों को ताक पर रखकर पत्रकार की हत्या कर दी. विज्ञप्ति में यह भी कहा गया था कि नेमीचंद के विरूद्ध जो भी आरोप थे उसकी जांच होनी चाहिए थी. विज्ञप्ति के माध्यम से दक्षिण रीजनल कमेटी के सचिव ने वादा किया था कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा नहीं होगी. पार्टी नीतियों के विरूद्ध कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासानात्मक कार्रवाई भी करने की बात कही गई थी. लेकिन नक्सलियों के दोबारा इस तरह के हमले से दावों की पोल खुल गई है. फिर से नक्सलियों ने पत्रकारों को अपना निशाना बनाया. झारखंड के खूंटी जिले में भी पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के नक्सलियों ने मुढहू में हिंदी समाचार पत्र में कार्य करने वाले जितेंद कुमार सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
पिछले कुछ समय से पत्रकार नक्सलियों के निशाने पर हैं. बस्तर क्षेत्र के पत्रकारों ने वरिष्ठ पत्रकार साई रेड्डी की हत्या की निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने कहा कि इससे लगता है कि नक्सली अब प्रेस का मुंह भी बंद करने की नीति पर उतर आए हैं.
आर के गांधी की रिपोर्ट