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अब वाहनों पर फर्जी प्रेस लिखने वालों की खैर नहीं

अलीगढ़/हाथरस। सावधान! अब उन लोगों की आफत आने वाली है, जिन लोगों ने अपने अपने वाहनों पर फर्जी तरीके से प्रेस शब्द का प्रयोग कर रखा है। जनपद के पुलिस अधीक्षक ने सभी थानों की पुलिस को निर्देश दिये हैं कि प्रेस लिखे वाहनों की चेकिंग की जाये. उन्होंने मीडिया कर्मियों से अपील की है कि मीडियाकर्मी अपने साथ अपना आईडी कार्ड रखें और पुलिस की चेकिंग कार्यवाही में सहयोग करें। 
अलीगढ़/हाथरस। सावधान! अब उन लोगों की आफत आने वाली है, जिन लोगों ने अपने अपने वाहनों पर फर्जी तरीके से प्रेस शब्द का प्रयोग कर रखा है। जनपद के पुलिस अधीक्षक ने सभी थानों की पुलिस को निर्देश दिये हैं कि प्रेस लिखे वाहनों की चेकिंग की जाये. उन्होंने मीडिया कर्मियों से अपील की है कि मीडियाकर्मी अपने साथ अपना आईडी कार्ड रखें और पुलिस की चेकिंग कार्यवाही में सहयोग करें। 
 
ज्ञात हो कि जनपद में लगभग एक दर्जन दैनिक समाचार पत्र नियमित आते व पढ़े जाते हैं। हाथरस से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक समाचार पत्रों को शासन से सपोर्ट न मिलने के कारण एक दो स्थानीय साप्ताहिक समाचार पत्र ऐसे हैं, जो कि अपने आस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन जनपद भर में चारों तरफ अगर नजर उठाकर देखा जाये तो हजारों की संख्या में दो पहिया वाहन तथा सैकडों की संख्या में चार पहिया वाहन ऐसे दिखाई देते हैं, जिन पर प्रेस शब्द लिखा होता है। प्रेस शब्द लिखे होने के कारण पुलिसकर्मी भी चेकिंग के समय ऐसे वाहनों को चेक करने से कतराते हैं। 
 
हजारों की संख्या में ऐसे समाचार पत्रों के आई कार्ड लोगों के पास हैं, जो समाचार पत्र न तो शहर में आते हैं और न शहर के लोग इन समाचार पत्रों के नामों से परिचित हैं। कुछ लोगों ने अपना शौक पूरा करने के लिये तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर रौव गालिव करने के लिये समाचार पत्रों का सहारा लिया हुआ है। ऐसे लोग दस या बीस कापियां मंगाकर समाचार पत्र के प्रतिनिधि का तमगा लगाकर डोलते हैं और अपने कानूनी व गैर कानूनी कार्यों को बड़ी सफाई के साथ अंजाम देने में लगे रहते हैं। 
 
हालात ऐसे हैं कि जनपद के शहरी क्षेत्र में रहने वाले हर तीसरे व्यक्ति की जेब में किसी न किसी प्रेस का आई कार्ड देखने को मिल जाता है। जिसके कारण ऐसा लगता है कि शहरी क्षेत्रों में हर तीसरा आदमी पत्रकार है। ऐसे लोगों के पास जो आई कार्ड होते हैं, उनमें से अधिकतर फर्जी तरीके से बनवाये गये होते हैं और प्रेस संस्थानों का ऐसे आई कार्डों से दूर दूर तक का कोई वास्ता नहीं होता।
 
अलीगढ़ से कुमार प्रवीन की रिपोर्ट
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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