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पुत्र मोह में मगन मुलायम के हाथों मारे गए मोहन

लखनऊ से खबर है कि समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने मोहन सिंह के उस बयान को काफी गंभीरता से लिया जिसमें उन्होंने मुलायम के बेटे अखिलेश यादव का विरोध किया था. मुलायम के निर्देश पर सपा के प्रवक्ता पद से मोहन को बर्खास्त कर दिया गया है. समाजवादी पार्टी के नए प्रवक्ता अब रामगोपाल यादव होंगे. मतलब, अब प्रवक्ता भी मुलायम के खानदान के ही हो गए. इस तरह वंशवाद की गाड़ी धड़ल्ले से चल निकली है. मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव…. जाने कितने नाम हैं जो मुलायम के खानदान के हैं और समाजवादी पार्टी की साइकिल दौड़ा रहे हैं. मोहन सिंह साफ सुथरी छवि वाले समाजवादी चिंतक हैं लेकिन मुलायम के खानदान के नहीं हैं इसलिए उन्हें तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ा.

लखनऊ से खबर है कि समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने मोहन सिंह के उस बयान को काफी गंभीरता से लिया जिसमें उन्होंने मुलायम के बेटे अखिलेश यादव का विरोध किया था. मुलायम के निर्देश पर सपा के प्रवक्ता पद से मोहन को बर्खास्त कर दिया गया है. समाजवादी पार्टी के नए प्रवक्ता अब रामगोपाल यादव होंगे. मतलब, अब प्रवक्ता भी मुलायम के खानदान के ही हो गए. इस तरह वंशवाद की गाड़ी धड़ल्ले से चल निकली है. मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव…. जाने कितने नाम हैं जो मुलायम के खानदान के हैं और समाजवादी पार्टी की साइकिल दौड़ा रहे हैं. मोहन सिंह साफ सुथरी छवि वाले समाजवादी चिंतक हैं लेकिन मुलायम के खानदान के नहीं हैं इसलिए उन्हें तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़ा.

कहा जाता है कि जहां विचारों में भिन्नता होती है, वहां ज्यादा अच्छा लोकतंत्र होता है. लेकिन इस देश के सियासी दल तानाशाही वाले विचारधारा पर चल रहे हैं. सुप्रीमो जो बोले सही, बाकी सब चुप रहें. सपा में अखिलेश यादव को प्रमोट किया जा रहा है. अपनी बढ़ती उम्र के कारण मुलायम अपने बेटे अखिलेश को भरपूर प्रमोट कर रहे हैं. मोहन सिंह का बयान उन्हें इसलिए नागवार लगा क्योंकि वे उनके बेटे के बयान के खिलाफ क्यों बोल गए. आनन-फानन में मोहन को प्रवक्ता पद से बर्खास्त कर यह संदेश पूरी पार्टी में दे दिया गया कि अखिलेश यादव का मतलब कोई युवा नेता न समझा जाए बल्कि उन्हें पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के बराबर ही समझा जाए.

गौरतलब है कि मोहन सिंह ने डीपी यादव पर अपना बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि डीपी यादव बड़े नेता हैं और अखिलेश को डीपी यीदव के बारे में कुछ भी कहने का कोई हक नहीं है. इससे पहले समाजवादी पार्टी के महासचिव आजम खान ने भी डीपी यादव की तारीफ की थी लेकिन बाद में वो अपने बयान से मुकर गए. दरअसल डीपी यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल करने की बात चल रही थी. पार्टी महासचिव आजम खान डीपी यादव को पार्टी में शामिल किए जाने की वकालत कर रहे थे. लेकिन अखिलेश ने साफ शब्दों में डी पी यादव को पार्टी में लेने इनकार कर दिया था. इसी के बाद अखिलेश के खिलाफ मोहन सिंह ने बयान दिया था. लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के खिलाफ मोहन सिंह को बयान देना महंगा पड़ गया. पार्टी ने मोहन सिंह को राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया.

सपा की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर मोहन सिंह को राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया गया है. उनके स्थान पर दल के महासचिव राम गोपाल यादव को पार्टी का नया राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया है. सिंह को पद से हटाए जाने की कार्रवाई को उनके बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आपराधिक पृष्ठभूमि के विधायक डी. पी. यादव की तरफदारी किये जाने से जोड़कर देखा जा रहा है. बसपा से टिकट नहीं मिलने के बाद यादव ने हाल में रामपुर में सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां से मुलाकात की थी और उन्होंने बदायूं के सहसवान क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर दिया था. हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कहा था कि सपा प्रदेश में साफ-सुथरी सरकार देने के लिये प्रतिबद्ध है. लिहाजा डी. पी. यादव के लिये उनकी पार्टी में कोई जगह नहीं है.

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