Virendra Yadav : 'आप' और केजरीवाल की सबसे बड़ी सीमा उनकी विचारधारा विहीनता और 'नो आईडियालोजी ' का नारा है. राजनीतिक तंत्र 'न वाम न दक्षिण' की विचारधारा विहीनता से नहीं चलता है. हाँ, इससे म्युनिसिपलटियों को जरूर चलाया जा सकता है, मेट्रोपालिटन दिल्ली को भी चलाया जा सकता है.
'आप' को देश की वृहत्तर राजनीति में आने और विकल्प निर्माण में शामिल होने के लिए यह स्पष्ट करना होगा कि देश के विकास की अवधारणा में वे मोदी के बरक्स कहाँ खड़े हैं? कार्पोरेट के साथ या हाशिये के समाज के साथ. वंचित वर्गों को विशेष अवसर दिए जाने पर उनकी पार्टी क्या सोचती है?
उन्हें मोदी की विचारधारा के बरक्स अपनी स्थिति को स्पष्ट करना होगा और यह सब करने के बाद भी क्या वह मतदाता उनके साथ होगा जिसकी पसंद आज मोदी हैं? …. क्या शाजिया इल्मी तब भी हारती जब वो मुस्लिम नहीं होती? 'आप' के मतदाता ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को क्यों नहीं जिताया? क्या इसलिए कि इस मतदाता की पसंद दिल्ली में केजरीवाल और लालकिले पर मोदी देखने की थी? इन प्रश्नों को स्थगित नहीं किया जाना चाहिए. फिलहाल 'न वाम न दक्षिण' का विचार अरविन्द केजरीवाल की जुबानी जान लीजिये -"Kejriwal says AAP refuses to be guided by ideologies and that they are entering politics to change the system: "We are aam aadmis. If we find our solution in the Left we are happy to borrow it from there. If we find our solution in the Right, we are happy to borrow it from there."
साहित्यकार वीरेंद्र यादव के फेसबुक वॉल से.





