पिछले महीने एनडीटीवी ने एक डॉक्टर मुनीर खान की चमत्कारिक दवा के बारे में खबर चलाई थी. जिसमें बताया गया था कि ये गलत दवा है तथा इसे मार्केट में रोकने पर प्रतिबंधित कर दिया गया है. इस समय एनडीटीवी खुद ही उसी दवा को अपने चैनल पर ही प्रमोशनल फीचर में चला रहा है. ताज्जुब हो रहा है कि कैसे कोई चैनल जिस दवा के गलत होने की खबर चलाई थी उसी के विज्ञापन को अपने ही चैनल पर चला रहा है.
दो साल पहले टीवी पर फिल्म अभिनेत्री तबस्सुम एक स्वघोषित साइंटिस्ट और डॉ मुनीर खान की एक दवा बाडी रिवाइवल का प्रचार किया करती थीं. डॉक्टर साहब का दावा था कि इस दवा से कैंसर और एचआईवी का इलाज संभव है. बस क्या था लोग टूट पड़े. 100 मिली की एक बोतल पंद्रह-पंद्रह हजार में बेंची थी. जब लोगों ने दवा ले ली तब पता चला कि ये तो ठगी थी.
बड़ी संख्या में लोगों ने मुनीर खान के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायत शुरू कर दी. 143 लोगों ने खान के खिलाफ शिकायत की थी जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू कर दी थी. मुनीर खान को गिरफ्तार भी किया गया. जांच शुरू हुई तो मुनीर खान के एक से एक फर्जीवाड़े की कहानियां सामने आने लगीं थीं.
प्रवर्तन निदेशालय और पुलिस ने जांच में पाया कि मुनीर खान तो डॉक्टर ही नहीं था. जांच में पाया गया कि उसने एक फर्जी इंस्टीट्यूट से सिर्फ दो महीने में साढ़े तीन हजार रूपये में डिग्री सर्टिफेकट बनवाई थी. उसने जिस दवा का इतना प्रचार किया उस दवा का उस दवा को किसी अधिकृत मेडिकल संस्थान से मान्यता नहीं प्राप्त थी. इस दवा को लोगों के लिए हानिकारक मानते हुए इसे जब्त करने के आदेश दे दिया गया था. इस खबर को पीटीआई के हवाले से एनडीटीवी ने भी चलाया था.
अभी पिछले 3 दिसम्बर को रात में मैने एनडीटीवी चैनल ट्यून किया तो ये देखकर दंग रह गया कि उसी प्रतिबंधित दवा 'बाडी रिवाइवल' के प्रोग्राम को एनडीटीवी चैनल पर प्रमोशनल फीचर के तहत रात में चलाया जा रहा था. वो तो मुझे पिछली खबर याद थी इसलिए मेरा ध्यान तुरन्त इस पर चला गया लेकिन कितने लोग हैं जो सारी बात याद नहीं रखते और इन चैनलों पर भरोसा करके बुरी तरह इन गलत दवाओं के दुष्प्रभाव के शिकार हो जाते हैं.
एक तरफ तो ये चैनल ऐसी फ्रॉड को जनता के सामने लाकर पहले अपनी विश्वसनीयता कायम करते हैं कि हम कितनी सरोकारी पत्रकारिता कर रहे हैं और दूसरी तरफ ऐसे ही लोगों के साथ मिलकर इसी विश्वास का फायदा उठाते हैं. अपनी कमाई करने के चक्कर में ये इस बात का भी ख्याल नहीं रखते कि वो किसी की जान से खेल रहे हैं.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित