पटना से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के एक कारनामे के कारण बिहार सरकार को बिहार विधान परिषद में शर्मिंदगी उठानी पड़ी। हालत यह हो गयी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सदन में खेद व्यक्त करना पड़ा और यहां तक कहना पड़ा कि आजकल आउटसोर्सिंग का जमाना है। लेकिन फ़िर भी जो भूल हुई है वह बहुत गंभीर है और सरकार इस पूरे मामले की जांच करवायेगी। दरअसल यह पूरा मामला बिहार सरकार के सूचना एवं प्रकाशन विभाग और दैनिक हिन्दुस्तान के संयुक्त प्रयास से बिहार के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित एक विशेष पत्रिका से जुड़ा है। इस मामले को मंगलवार को परिषद में भाजपा के विधान पार्षद हरेन्द्र प्रताप पांडेय ने उठाया।
गैरसरकारी संकल्प के रुप में श्री पांडेय ने संविधान सभा के सदस्य रहे स्व सच्चिदानंद सिन्हा के बक्सर स्थित पैतृक गांव में आदमकद प्रतिमा लगवाने की मांग की। लेकिन इससे पहले उन्होंने शर्त रखी कि इसका जवाब केवल मुख्यमंत्री ही दें तो वे अपना प्रस्ताव सदन में रखेंगे। श्री पांडेय के इस कथन पर हालांकि सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा टोका टाकी हुई लेकिन जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी सहमति दे दी तब श्री पांडेय सदन को यह कहकर सकते में डाल दिया कि सूचना एवं प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रिका में स्व सच्चिदानंद सिन्हा का नाम है और उनके नाम पर जो तस्वीर प्रकाशित की गयी है वह लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सचिव रहे सच्चिदानंद सिन्हा की है।
श्री पांडेय के इस खुलासे के बाद सदन में कुछ देर के लिये शांति छा गयी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यकीन दिलाने के लिए पत्रिका की प्रति श्री पांडेय ने खुद जाकर दी। बाद में पत्रिका पलटने के बाद श्री कुमार ने स्वीकार किया कि यह एक बड़ी चूक हुई है और इस मामले की सरकार जांच करवायेगी। वैसे इस पूरे मामले में दिलचस्प यह रहा कि दैनिक हिन्दुस्तान के जिस पत्रकार ने उक्त पत्रिका के लिए मसाले जुटाये थे, वे भी प्रेस दीर्घा में मौजूद थे। जब यह सब हो रहा था तब उनके चेहरे का भाव सारी कहानी बिना कहे ही बता रही थी।
पटना से नवल कुमार की रिपोर्ट