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अखबारी दुनिया से संबंधित कुछ आश्चर्यजनक आंकड़े : पढ़ेंगे तो सोच में पड़ जाएंगे

Subhash Shalya : आश्चर्यजनक आंकड़ा (1)… राजस्थान में लगभग 5732 समाचार पत्र आरएनआई से रजिस्टर्ड हैं. एक समाचार पत्र के चार पृष्ठों का एक पेज लगभग 17 ग्राम का होता है. अर्थात एक समाचार पत्र का औसत वजन 70 ग्राम होता है. पीआरबी एक्ट की धारा "11 क" के अनुसार प्रत्येक समाचार पत्र को दो निःशुल्क प्रतियाँ जिला कलेक्टर कार्यालय में भेजनी अनिवार्य है.

Subhash Shalya : आश्चर्यजनक आंकड़ा (1)… राजस्थान में लगभग 5732 समाचार पत्र आरएनआई से रजिस्टर्ड हैं. एक समाचार पत्र के चार पृष्ठों का एक पेज लगभग 17 ग्राम का होता है. अर्थात एक समाचार पत्र का औसत वजन 70 ग्राम होता है. पीआरबी एक्ट की धारा "11 क" के अनुसार प्रत्येक समाचार पत्र को दो निःशुल्क प्रतियाँ जिला कलेक्टर कार्यालय में भेजनी अनिवार्य है.

इसका मतलब यह हुआ कि 5732 X 2= 11464 समाचार पत्र रोजाना जिला कलेक्टर कार्यालयों में आने चाहिए. 11464 समाचार पत्रों का वजन हुआ लगभग= लगभग 8 क्विंटल. 365 दिनों में कुल वजन हुआ= लगभग 2920 क्विंटल. समाचार पत्रों के आज के रद्दी के भाव= 1000 रुपये प्रति क्विंटल. सरकार को रद्दी से कुल राजस्व प्राप्ति= उनतीस लाख बीस हजार रुपये मात्र अर्थात 29,20,000 /- रुपये प्रति वर्ष. यह राशि तो केवल नियमों की पालना नहीं करने से राजस्व हानि का एक छोटा सा नमूना है.

आश्चर्यजनक आंकड़ा (2)… पीआरबी एक्ट की धारा "16 क" के अनुसार दो निःशुल्क प्रतियाँ जिला कलेक्टर कार्यालय को नहीं भेजने वाले समाचार पत्रों पर हर एक कॉपी के हिसाब से 50 रुपये शास्ति लगानी अनिवार्य है. दो कॉपी के हिसाब से 5732X2= 11464. राजस्थान राज्य में जिला कलेक्टर कार्यालय में 64 समाचार पत्र भी नहीं आते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि 11400 समाचार पत्रों पर प्रतिदिन जुर्माना 11400X50= 570000 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगना चाहिए. 365 दिन में लगने वाली कुल जुर्माना राशि 570000X365 = 20,80,50,000/- अर्थात प्रतिवर्ष बीस करोड़ अस्सी लाख पचास हजार रुपये का राजकोष को नुकसान.

आश्चर्यजनक आंकड़ा (3)… ऐसे बहुत सारे अख़बार हैं जो छपते ही नहीं हैं. केवल कागजों में प्रसार संख्या दिखाकर सरकार से विज्ञापन ले लेते हैं. जिस दिन विज्ञापन छापना होता है उसी दिन अख़बार छाप लेते हैं और सरकारी विभागों में भेज देते हैं. यदि पीआरबी एक्ट की धारा "11 क" एवं धारा "16 क" की पालना इमानदारी से होने लग जाये तो सरकार से करोड़ों अरबों रुपये के विज्ञापन लेने वाले फर्जी समाचार पत्रों की दुकान बंद हो जायेगी. इसके साथ-साथ भ्रष्ट अधिकारियों की दुकानें भी बंद हो जाएगी. सिस्टम ठीक करने का उपाय- राजस्थान उच्च न्यायालय में पूरे राजस्थान का उपर्युक्त आंकड़ा बताकर जनहित याचिका लगाई जा सकती है.

सुभाष शाल्या के फेसबुक वॉल से.

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