झांसी। राजकीय संग्रहालय में आयोजित दशम रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह में अजीत खरे को दसवें रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा गया. हिंदुस्तान लखनउ के विशेष संवाददाता अजीत खरे को दशम रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार के रूप में 11 हजार रूपये नगद और प्रशस्तिपत्र प्रदान किया गया.
पुरस्कार समारोह के दैरान वरिष्ठ पत्रकार जगदीश उपासने ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मीडिया के समक्ष भरोसे यानी विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो गया है. पत्रकारिता भरोसे के बल पर ही चलती है. यदि भरोसा ही टूट गया तो सूचनाएं कैसे सही मिलेंगी.
जगदीश उपासने ने उदाहरण देकर समझाया कि भरोसे का संकट होने के कारण ही चुनाव के समय देश में होने वाले सर्वेक्षण जनता के मूड को भांप नहीं पाते हैं. श्री उपासने ने मीडिया की वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज पूरा सूचना संसार दो हिस्सों में बंट गया है. एक ओर सूचना पर एकाधिकार रखने वाले हैं दूसरी तरफ इंटरनेट पर मनमाफिक तरीके से सूचनाएं हासिल करने वाले लोगों का वर्चुअल वर्ल्ड. भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे अधिक है. इस तथ्य को हमें ध्यान में रखना होगा. उपासने से पेड न्यूज के संकट का भी जिक्र किया. साथ ही मीडिया समूहों में प्रचलित क्रास ओनरशिप को भी रेखांकित किया. उन्होंने पत्रकारों को समय के साथ हो रहे बदलावों के हिसाब से अप टू डेट रहने की सलाह दी और कहा कि जो लोग खुद को अद्यतन रखते हैं उनकी उपयोगिता हर काल में बनी रहती है.
सम्मानित पत्रकार अजीत खरे ने कहा कि पत्रकारों को समूह की व्यावसायिक जरूरतों और आम जनता के सरोकारों के बीच समन्वय बनाकर काम करना होगा.
समारोह में संस्थान के अध्य़़क्ष डा. सुधांशु त्रिपाठी ने पिछले नौ पुरस्कारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने पत्रकारिता की चुनौतियों का भी उल्लेख किया. इस समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार कैलाशचंद्र जैन ने की. इस समारोह में स्थानीय पत्रकार कांतिचंद सक्सेना और जानकीशरण वर्मा को भी सम्मानित किया गया.
उमेश शुक्ल