मधु किश्वर समेत छोकरों की टीम जब इंडिया टीवी से संपर्क करती है तो पत्रकार मामले की तहकीकात करने की बजाय उनका टूल बन जाता है। यह भी मुमकिन है कि पत्रकार ने किसी की शह पर खबर बनाई या फिर अपने ज़मीर का सौदा कर लिया हो। ख़बर का नतीजा यह निकलता है कि कथित आरोपी अगली सुबह चौथी मंजिल से कूद कर जान दे देता है। एक तटस्थ पत्रकार मामले की तह तक जाने के लिए छोकरों से कुछ ज़रूरी सवाल ज़रूर पूछता। जैसे कि..
1- आपकी इस मामले में दिलचस्पी क्यों है?
2- कथित पीड़ित किसी निष्पक्ष नारीवादी के पास जाने की बजाय मोदीभक्त की शरण में क्यों गई?
3- 24 घंटे के भीतर लड़की 40 बार अपने बयानों से क्यों पलटी?
4- टीम बूंद के दोनों मुखिया ने फेसबुक पर सार्वजनिक तरीके से माफी क्यों मांगी?
5- टीम बूंद के छह सदस्यों ने खुर्शीद के घर जाकर लड़की की कहानी को अविश्सनीय कहकर हाथ क्यों जोड़ा?
रिपोर्टर इस तरीके के कई गंभीर सवाल पूछने की बजाय खुर्शीद के तमतमाते चेहरे के विजुअल्स चलाता है। मधु किश्वर झूठ कहती है कि बूंद की फंडिंग आईएसडी से होती थी लेकिन रिपोर्टर सवाल नहीं करता। रिपोर्टर बोलता है कि लड़की ने खुर्शीद के डर से दिल्ली छोड़ दिया था लेकिन इस मक्कारी के पक्ष में कोई सबूत नहीं दिखाता। रिपोर्टर बस छिछोरे छोकरों के बताए रास्ते पर चलता है।
छोकरों के साथ नॉर्थ ईस्ट लड़की का इंटरव्यू ले आता है और उनके आरोपों पर पूरी स्क्रिप्ट तैयार करता है। पत्रकार उन लोगों तक आखिर क्यों नहीं पहुंच पाता जिन्होंने लड़की की बयानबाजी को खारिज करते हुए खुर्शीद से माफी मांगी थी। जिन लोगों ने खुर्शीद का मृत शरीर देखा, उनका गुस्से से तमतमाया हुआ चेहरा भी ज़रूर देखा होगा। वह गुस्सा उन सभी के लिए था जिन्होंने सिर्फ लड़की के आरोपों पर खुर्शीद का चरित्रहनन किया। वह गुस्सा उस फटीचर के लिए भी था जिसकी एकपक्षीय खबर ने खुर्शीद को छत से छलांग लगाने को मजबूर कर दिया। वह कभी भी पत्रकार नहीं माना जाएगा। वह हत्यारा है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






