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रजत शर्मा ने स्वयं जज बन खुर्शीद भाई को अपराधी बनाते हुए उन्हें उनके अंजाम तक पंहुचा देने की धमकी दी

Samar Anarya : 16 दिसंबर की शाम खुर्शीद भाई से बात हुई तो उन्होंने Abhishek Upadhyay के इंडिया टीवी के लिए किये गए उनके इंटरव्यू के बारे में बताया. वह बहुत उदास थे और आहत भी. मैंने तुरंत अभिषेक को फोन किया क्योंकि वह इलाहाबाद के जमाने से दोस्त है. उसे सिर्फ यही कहा कि यह सोच लेना कि तुम्हारी स्टोरी खुर्शीद की जान ले लेगी.

Samar Anarya : 16 दिसंबर की शाम खुर्शीद भाई से बात हुई तो उन्होंने Abhishek Upadhyay के इंडिया टीवी के लिए किये गए उनके इंटरव्यू के बारे में बताया. वह बहुत उदास थे और आहत भी. मैंने तुरंत अभिषेक को फोन किया क्योंकि वह इलाहाबाद के जमाने से दोस्त है. उसे सिर्फ यही कहा कि यह सोच लेना कि तुम्हारी स्टोरी खुर्शीद की जान ले लेगी.

मैंने अभिषेक को खुर्शीद अनवर द्वारा किये गए मानहानि के मुक़दमे की खबर देते हुए कानूनी कार्यवाही शुरू होने तक यह स्टोरी न करने की गुजारिश की. (ध्यान रखें स्टोरी न करने की नहीं, बस कानूनी कार्यवाही शुरू होने तक न करने की क्योंकि यह स्टोरी लगभग ब्लैकमेलिंग बन गए मीडिया ट्रायल को ही आगे बढ़ा रहा था. ) अभिषेक ने मुझसे वादा भी किया और कहा कि ऐसे थोड़े चल जाती है स्टोरी, समय लगता है.

मैंने खुर्शीद भाई को यह बताया भी और बहुत रात तक उनसे बात करता रहा. वह उस रात भी सुसाइडल हो रहे थे. अगले दिन वादा तोड़कर इंडिया टीवी ने स्टोरी चला दी. हद यह कि रजत शर्मा ने स्वयं जज बन खुर्शीद भाई को अपराधी बनाते हुए उन्हें उनके अंजाम तक पंहुचा देने की धमकी दी. शर्मनाक था यह. खासतौर पर इसलिए भी कि अभिषेक उपाध्याय ने सब कुछ करते हुए भी एक बार भी मानहानि के मुकदमे का जिक्र तक नहीं किया जो कि पत्रकारिता के मूल्यों से बेईमानी है.

खैर, स्टोरी के बाद ज़हरीला तपनों और उस पूरे समूह ने 'दलाल कहाँ भाग गए' जैसे शानदार सवाल पूछने शुरू किये. चुप रहना विकल्प नहीं बचा था सो उनके और अपने सबसे करीबी दोस्तों में एक Anshu Malviya से लम्बी बात कर यह स्टेटस लिखा. वैसे भी यह स्टेटस मेरे 26 अक्टूबर वाले स्टेटस से बिलकुल अलग नहीं है, मेरा स्टैंड हमेशा से वही रहा है और जाकर देख आइये उस पर खुर्शीद भाई ने क्या लिखा था. बाकी यह गलती जरुर हुई कि उस स्टोरी को 'अच्छा' कहना पड़ा जो सीधे सीधे ब्लैकमेलिंग थी.नहीं कहना चाहिए था. पर तब कहाँ मालूम था कि खुर्शीद भाई को बचा न पायेंगे. [अभिषेक उपाध्याय इतनी उम्मीद तो कर सकता हूँ कि इस बातचीत की सत्यता प्रमाणित कर दोगे]

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय 'समर' के फेसबुक वॉल से.

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