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लोहिया जी की बात को खुर्शीद क्यों नहीं जान या मान सके थे?

Dayanand Pandey : यह अपने को पढ़ा-लिखा मानने वाले लोग कानून और इमेज के आगे इतने कायर क्यों हो जाते हैं? किस्से और कयास बहुतेरे हैं। पर खुर्शीद अनवर का किस्सा ताज़ा है। अगर खुर्शीद अनवर के साथियों की बात को एक बार मान ही लिया जाए तो खुर्शीद ने बलात्कार नहीं किया था। हां, संभोग किया था। सहमति से किया था। तो क्या बुरा किया था? लोहिया तो कहते थे कि अगर यौन संबंध शोषण या ज़बरदस्ती का नहीं है तो जायज है। खुर्शीद इस बात को क्यों नहीं जान या मान सके थे? क्यों अपने को इस तरह दोषी मान कर एक अपराध कर दिया। आत्महत्या भी अपराध है। और बलात्कार भी।

Dayanand Pandey : यह अपने को पढ़ा-लिखा मानने वाले लोग कानून और इमेज के आगे इतने कायर क्यों हो जाते हैं? किस्से और कयास बहुतेरे हैं। पर खुर्शीद अनवर का किस्सा ताज़ा है। अगर खुर्शीद अनवर के साथियों की बात को एक बार मान ही लिया जाए तो खुर्शीद ने बलात्कार नहीं किया था। हां, संभोग किया था। सहमति से किया था। तो क्या बुरा किया था? लोहिया तो कहते थे कि अगर यौन संबंध शोषण या ज़बरदस्ती का नहीं है तो जायज है। खुर्शीद इस बात को क्यों नहीं जान या मान सके थे? क्यों अपने को इस तरह दोषी मान कर एक अपराध कर दिया। आत्महत्या भी अपराध है। और बलात्कार भी।

लेकिन सच चाहे जो भी हो खुर्शीद कायरता और अपराध दोनों ही के दोषी हैं। और कि उन के कायर और लफ़्फ़ाज़ दोस्तों को क्या कहें? दो-एक को छोड़ कर, जब वह जीवित थे तब, कोई उन के साथ खड़ा नहीं था। ज़्यादातर फंदा लिए खड़े थे। और अब जब खुर्शीद एक कायराना हरकत कर विदा हो चुके हैं तो उन के कायर साथी उन्हें निर्दोष साबित करने का शीर्षासन कर रहे हैं। क्या मतलब है इसका?

एक से एक सती सावित्री टाइप लोग उन्हें सर्टिफ़िकेट बांट रही हैं। कि हमेशा उनके साथ वह सुरक्षित महसूस करती थीं। उनके घर में दरवाज़ा खोल कर सो जाती थीं। खुर्शीद के जीते जी जो यह सर्टिफ़िकेट या साथ दे दिया होता तो शायद उन का जीवन बच सका होता। पर अब इस साथ और सर्टिफ़िकेट का क्या? अब एक से एक गणमान्य लोग सर फुटौव्वल के दृश्य परोस रहे हैं; ब्लाक, अनफ़्रेंड, आरोप-प्रत्यारोप, घटाटोप और क्या-क्या! कायरता और नौटंकी की भी एक हद होती है।

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.

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