Om Thanvi : मधु किश्वर के भाई पर बलात्कार का आरोप लगा। पुलिस अभियुक्त यानी उनके भाई को गिरफ्तार करने घर पहुंच गई। मधु दबंग महिला हैं। उन्होंने पुलिस से संघर्ष किया और रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसके लिए शिकायतकर्ता को दस हजार रुपए भी दिए गए।
वजह? मधु नहीं मानती थीं कि उनका भाई गुनहगार है। उनका कहना था कि 'झूठी' शिकायत से वह एक दिन भी अंदर चला गया (जो जाता ही) तो उसकी नौकरी चली जाएगी।
क्या निर्दोष मान लेने का यह अधिकार मधु बलात्कार के अन्य आरोपितों को देंगी, जब किसी अन्य आरोपित की नौकरी — या जान भी — जाने का खतरा हो? देश में कानूनी इदारे किस खुशी में स्थापित हैं, जहां मधु न अपने भाई के लिए गईं, न पूर्वोत्तर की युवती के लिए, जो अंततः मदद के लिए ही उनके बलात्कार का आरोप लेकर पास पहुंची थी?
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जनसत्ता अखबार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से साभार.






