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लखनऊ

यूपी पुलिस में बॉडी प्रोटेक्टर, लाठी खरीद घोटाला

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने वर्ष 2010 में पुलिस विभाग के लिए बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड की खरीद में भारी घोटाले का आरोप लगाया है. वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद को  बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड  के खरीद की आवश्यकता हुई. उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद के क्रयादेश दिनांक 09/09/2010 द्वारा  154106 बॉडी प्रोटेक्टर रुपये 1660 प्रति नग, 237501 पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 214 प्रति नग तथा 111159 पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 1400 प्रति नग की आपूर्ति किये जाने का आदेश प्रदान किया गया. कुल खरीद लगभग 70 करोड़ रुपये की थी.

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने वर्ष 2010 में पुलिस विभाग के लिए बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड की खरीद में भारी घोटाले का आरोप लगाया है. वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद को  बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड  के खरीद की आवश्यकता हुई. उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद के क्रयादेश दिनांक 09/09/2010 द्वारा  154106 बॉडी प्रोटेक्टर रुपये 1660 प्रति नग, 237501 पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 214 प्रति नग तथा 111159 पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 1400 प्रति नग की आपूर्ति किये जाने का आदेश प्रदान किया गया. कुल खरीद लगभग 70 करोड़ रुपये की थी.

ये टेंडर मेसर्स बंसल इंडस्ट्रीज, गाज़ियाबाद, दर्प इंडस्ट्रियल पोलिमर प्राइवेट लिमिटेड, कानपुर तथा श्री गणेश इंडस्ट्रीज को मिले. डॉ ठाकुर ने उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोप लगाया है कि ये तीनों फर्म स्वयं को उत्पादक कम्पनियाँ बताती हैं जबकि इन्होंने ये सामग्री मात्र सप्लाई किया है. ये सामग्री मूल रूप से एसोसिएटेड कम्पोजिट मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड उधमसिंह नगर, पॉवर केम प्लास्ट लिमिटेड चंडीगढ़, ड्यूत्रोन सिंटरप्लास्ट अहमदाबाद, रेनबो इंटरनेशन, फतेहपुरी, दिल्ली जैसे विभिन्न फर्मों से बहुत ही कम दर में खरीदी है.

औसतन इन तीनों फर्मों को बॉडी प्रोटेक्टर  रुपये 925 में मिले जो 80%  मुनाफे पर रुपये 1660 में बेचे गए, पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 100 में मिले जो 114% मुनाफे पर रुपये 214 पर बेचे गए और पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 840  में मिले जो 67% मुनाफे पर रुपये 1400 सरकार को बेचे गए. साथ ही इन सामग्री की गुणवत्ता की जांच करने वाले इडमा लैब्स ने स्वयं जांच करने की जगह इन कंपनियों को हस्ताक्षरित खाली पत्र दे दिया जिसके कारण इनकी गुणवत्ता पर भी भारी प्रश्नचिन्ह है. अतः डॉ ठाकुर ने इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच कराये जाने और जांच के आधार पर कठोर कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

प्रमुख सचिव, गृह को प्रेषित पत्र—

 
सेवा में,                                                                                                 ,
श्री अनिल कुमार गुप्ता,
प्रमुख सचिव, गृह,
उत्तर प्रदेश
लखनऊ
विषय- बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड खरीद में भारी घोटाला विषयक  
महोदय,
मैं डॉ नूतन ठाकुर सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्य करती हूँ. मैं आपके समक्ष वर्ष 2010 में पुलिस विभाग के लिए ख़रीदे गए बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड में हुए भारी घोटाले की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहती हूँ जिनके सम्बन्ध में मुझे विश्वसनीय सूत्रों से अत्यंत महत्वपूर्ण अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिनके आधार पर मैं यह शिकायती पत्र आपको प्रेषित कर रही हूँ.

मुझे प्रदान किये गए अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद को  बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड  के खरीद की आवश्यकता हुई. उत्तर प्रदेश मुख्यालय, इलाहाबाद के क्रयादेश दिनांक 09/09/2010 द्वारा  154106 बॉडी प्रोटेक्टर रुपये 1660 प्रति नग, 237501 पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 214 प्रति नग तथा 111159 पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 1400 प्रति नग की आपूर्ति किये जाने का आदेश प्रदान किया गया. कुल खरीद लगभग 70 करोड़ रुपये की थी. इनमे श्री संजीव कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम, कानपुर के पत्र दिनांक 10/09/2010 द्वारा मेसर्स बंसल इंडस्ट्रीज, गाज़ियाबाद को  38527 बॉडी प्रोटेक्टर रुपये 1660 प्रति नग, 59375 पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 214 प्रति नग तथा 11280 पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 1400 प्रति नग  में आपूर्ति के क्रयादेश जारी किये गए.

इसके अतिरिक्त दर्प इंडस्ट्रियल पोलिमर प्राइवेट लिमिटेड, कानपुर तथा श्री गणेश इंडस्ट्रीज को भी इन आपूर्ति के क्रयादेश दिए गए. प्राप्त अभिलेखों के अनुसार इस सम्बन्ध में कई महत्वपूर्ण तथ्य विशेष ध्यान देने योग्य हैं-

1. इन तीनों कंपनी बंसल इंडस्ट्रीज, गाज़ियाबाद , दर्प इंडस्ट्रियल पोलिमर प्राइवेट लिमिटेड, कानपुर तथा श्री गणेश इंडस्ट्रीज के मालिक/कर्ताधर्ता एक ही व्यक्ति श्री पवन अग्रवाल बताये जा रहे हैं जो बंसल इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर तथा दर्प के डाइरेक्टर बताये जाते हैं जबकि उनकी पत्नी श्री गणेश इंडस्ट्रीज की प्रोपाइटर बताई जाती हैं. इस प्रकार ये तीनों फर्म आपस में जुड़े हुए हैं लेकिन ये तथ्य टेंडर की प्रक्रिया के दौरान छिपाए गए. यह तथ्य सरकारी अफसरों के सहयोग से सीधे-सीधे कार्टेल निर्माण की ओर इशारा करते हैं जो स्वयं में एक आपराधिक कृत्य है.  

2. ये तीनों फर्म स्वयं को उत्पादक कम्पनियाँ बताती हैं जबकि इनमे से कोई भी बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड का उत्पादन नहीं करतीं बल्कि इन तीनों ने ये सामग्री मात्र सप्लाई किया है.

3. इन तीनों फर्म ने ये सामग्री मूल रूप से एसोसिएटेड कम्पोजिट मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड, उधमसिंह नगर, उत्तराँचल, पॉवर केम प्लास्ट लिमिटेड, चंडीगढ़, ड्यूत्रोन सिंटरप्लास्ट, अहमदाबाद, संगम ट्रेडिंग, रेनबो इंटरनेशन, फतेहपुरी, दिल्ली जैसे विभिन्न फर्मों से खरीदी है.

4.  इन तीनों फर्मों ने ये सामग्री उपरोक्त फर्मों से बहुत ही कम दर में खरीदी है. उदहारण के लिए उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार बंसल इंडस्ट्रीज को एसीएम प्रोटेक्शन ने दिनांक 12/02/2011 को  बॉडी प्रोटेक्टर  रुपये 935 में दिए; दिनांक 16/05/2012 को पॉवर केम ने पोलीकार्बोनेट शील्ड  रुपये 842 में दिए, दिनांक 20/03/2012 को ड्यूत्रोन सिंटरप्लास्ट, अहमदाबाद ने पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 97 में दिए, दिनांक 07/11/2011 को संगम ट्रेडिंग, एस्सार इंटरप्राइजेज, रेनबो इंटरनेशनल तथा एस एंड एस कंपनी ने लाठी रुपये 105 में दिए, दिनांक 14/06/2012 को पॉवर केम ने पोलीकार्बोनेट शील्ड  रुपये 842 में दिये, दिनांक 27/09/2011 को रेनबो इंटरनेशनल ने पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 105 में दिए.  

5. इस प्रकार औसतन इन तीनों फर्मों को बॉडी प्रोटेक्टर  रुपये 925 में मिले जो रुपये 1660 में बेचे गए अर्थात बैठे-बैठे 80%  मुनाफे पर, पोलीकार्बोनेट लाठी रुपये 100 में मिले जो रुपये 214 पर बेचे गए अर्थात 114% मुनाफे पर और पोलीकार्बोनेट शील्ड रुपये 840  में मिले जो रुपये 1400 अर्थात 67% मुनाफे पर सरकार को बेचे गए.  
6. उपरोक्त तथ्यों से यह साफ़ अंदाजा लग जाता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के सम्बंधित अधिकारियों ने टेंडर की प्रक्रिया के पूर्व इन तीनों सामग्री का दर ज्ञात करने और दर निर्धारण करने की कार्यवाही में जानबूझ कर त्रुटि/लापरवाही की क्योंकि बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड ऐसी वस्तुएं नहीं हैं जिनके दर को ज्ञात करना और उनका वास्तविक बाजारू दर मालूम करना कोई मुश्किल कार्य रहा हो. जब वही सामग्री बाज़ार में आसानी से आधे दाम पर मिल रही थी तो उन्हें लगभग दूने दाम पर ख़रीदा जाना स्वतः यह सिद्ध करता है कि इस प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत रही और उन्होंने जानबूझ कर आपराधिक षडयंत्र के तहत इस प्रकार दूने दर पर सामान क्रय किया.

7. इस बात की और अधिक पुष्टि इस तथ्य से भी होती है कि इन तीनों फर्मों में गहरे आपसी सम्बन्ध हैं. यह बात इन तीनों फर्मों के एक मालिक/कर्ताधर्ता होने के अलावा इन तीओं से जुड़े कई ईमेल से भी पुष्ट होती है क्योंकि बहुधा ये एक-दुसरे के नाम के ईमेल इस्तेमाल करते हैं अथवा सप्लाई करने वाली कंपनी एक ही ईमेल से तीनों कंपनियों को संबधित करती हैं अथवा अदल-बदल कर ईमेल का प्रयोग करती हैं.

8. इसके अलावा अभिलेखों के अनुसार एक और भी गंभीर बात यह है कि बंसल इंडस्ट्रीज द्वारा प्रदान किये गए बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड आदि की क्वालिटी/गुणवत्ता के सम्बन्ध में कथित रूप से इडमा लैब्स द्वारा जांच की गयी लेकिन दिनांक 31/03/2011 को इडमा लैब्स द्वारा दर्प इंडस्ट्रियल पोलीमर को भेजे गए ईमेल में इडमा लैब्स ने गुणवत्ता मापक एजेंसी होने के बावजूद दर्प इंडस्ट्रियल को पहले से ही हस्ताक्षरित एक ब्लैंक (खाली) लेटर भेजा था जिस पर इडमा लैब्स की ओर से प्राधिकृत हस्ताक्षरी के साइन किये हुए थे ताकि दर्प इंडस्ट्रियल वाले इसमें अपनी सुविधानुसार जो चाहें वह भर लें. यह अभिलेख इस सम्भावना की ओर जबरदस्त इशारा करता है कि बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड जैसे पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील सामग्री की गुणवत्ता फर्जी तरीके से तैयार की गयी. इससे यह भी स्पष्ट है कि चूँकि गुणवत्ता मापन की अवस्था में ही खोट है अतः ना तो उपयोग किये जाने वाले पोलीकार्बोनेट लाठी एवं ना ही बचाव के लिए आवश्यक बॉडी प्रोटेक्टर तथा पोलीकार्बोनेट शील्ड की गुणवत्ता और विश्वसनीयता के सम्बंध में निश्चित रूप से कोई बात कही जा सकती है. इससे सिपाहियों के जीवन के साथ गन्दा खिलवाड़ किया गया दिखता है.

उपरोक्त सभी तथ्यों यह स्पष्ट है कि बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड जैसे पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तथा संवेदनशील सामग्री की खरीद में भारी गड़बड़ी हुई है और इसकी गुणवत्ता भी पूर्णतया संदिग्ध है.

अतः मैं आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-

1. इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच कराई जाये

2. यदि इसमें पुलिस विभाग अथवा अन्य किसी अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध आपराधिक तथा अन्य सेवा-सम्बंधित कार्यवाही की जाए

3. जांच में दोष पाए जाने पर सप्लाई करने वाले फर्मों के खिलाफ आपराधिक मुक़दमा करने, धनराशि वसूलने सहित आवश्यक विधिक कार्यवाही की जाए

4. इन बॉडी प्रोटेक्टर, पोलीकार्बोनेट लाठी एवं पोलीकार्बोनेट शील्ड की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाये और आवश्यक समझे जाने पर उन्हें पुलिसकर्मियों के जीवनभय के दृष्टिगत बदल दिया जाये

पत्र संख्या- NT/ Lathi/01                                                                                             
दिनांक-24/12/2013
भवदीय,
डॉ नूतन ठाकुर
लखनऊ  
 

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