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पटना के पत्रकार एसएन श्याम की गिरफ्तारी के खिलाफ धरना और विरोध मार्च का ऐलान

बिहार के वरीय पत्रकार और वर्किंग जर्नलिस्‍ट यूनियन ऑफ बिहार के अध्‍यक्ष एसएन श्‍याम की गिरफ्तारी आपात काल की याद दिलाती है। दिनांक 24 दिसम्‍बर 2013 को मध्‍यरात्रि में पटना पत्रकार नगर थाने की पुलिस टीम ने उनके घर को घेर लिया और दरवाजा पीटने लगे. पुलिस की इस हरकत से घरवालों ने सोचा कि अपराधियों ने धावा बोल दिया है. लिहाजा बचने और बचाने के लिए घर के सदस्‍यों के बीच अफरातफरी मच गयी.

बिहार के वरीय पत्रकार और वर्किंग जर्नलिस्‍ट यूनियन ऑफ बिहार के अध्‍यक्ष एसएन श्‍याम की गिरफ्तारी आपात काल की याद दिलाती है। दिनांक 24 दिसम्‍बर 2013 को मध्‍यरात्रि में पटना पत्रकार नगर थाने की पुलिस टीम ने उनके घर को घेर लिया और दरवाजा पीटने लगे. पुलिस की इस हरकत से घरवालों ने सोचा कि अपराधियों ने धावा बोल दिया है. लिहाजा बचने और बचाने के लिए घर के सदस्‍यों के बीच अफरातफरी मच गयी.

पुलिस छत पर भी घात लगाये बैठी हुई थी. द़श्‍य देख कर लग रहा था कि पुलिस किसी उग्रवादी या नक्‍सली को पकड़ने के अभियान में जुटी हुई है. पर सच्चाई तो ये है कि किसी नक्‍सली या उग्रवादी को पकड़ने में इसी पुलिस का पतलून गीला हो जाता है. न्‍यायालयों का आदेश है कि साधारण आरोपों में अति आवश्‍यक न हो तो किसी की गिरफ्तारी रात में नहीं की जाए.

श्री श्‍याम लम्‍बे अर्से से बिहार की राजधानी पटना में पत्रकारिता कर रहे हैं और वे समाजिक सरोकारों से भी जुड़े हुए हैं. इसके अलावा वे एक राष्‍ट्रीय पत्रकार संगठन के प्रदेश अध्‍यक्ष भी हैं. पुलिस को इसकी जानकारी भी रही है. बावजूद इसके उन्‍हें कोहरे से पटी सर्द मध्‍य रात्रि में गिरफ्तार किया गया और बीमार होने के बावजूद उन्‍हें बगैर गर्म कपड़े हाजत में बन्‍द कर पटना पुलिस ने मानवता को शर्मशार कर दिया. उन्‍हें बैठने तक के लिए कुछ नहीं दिया गया, मानों उनका आपराधिक इतिहास हो. खैर, पत्रकारों की सक्रियता और थाने पर पत्रकारों की उपस्थिति देखकर पुलिस वाले थोड़ा हिचकिचाये और उन्‍हें हथकडी नहीं लगाई.

पत्रकार नगर पुलिस ने उन्‍हें धोखाधड़ी और ठगी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि उसके पास श्री श्‍याम के अपराध में संलिप्‍तता के पर्याप्‍त सबूत हैं. माना जा रहा है कि पुलिस पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर पत्रकार की गिरफ्तारी की है और पुलिस आम आपराधिक आरोपों के जांच की तरह ही इस मामले में भी जांच कार्य को अंजाम दिया है. इस मामले में पत्रकार नगर पुलिस ने कोई वैज्ञानिक जांच नहीं किया है. श्री श्‍याम के बारे में कहा गया है कि किसी राज केपी सिन्‍हा के साथ उनकी तस्‍वीर है और कई जगहों पर दोनों का हस्‍ताक्षर पुलिस को मिला है, इसलिए उक्‍त आरकेपी सिन्‍हा द्वारा ठगी और धोखाधड़ी में श्री श्‍याम भी शामिल हैं.
मैं पुलिस से पूछना चाहता हूं कि किसी दारोगा के द्वारा अपराध करने पर उनके वरीय अधिकारी भी संलिप्‍त माने जायेंगे? क्‍योंकि दोनों का कई स्‍थानों पर एक साथ उपस्थिति के अलावा हस्‍ताक्षर भी रहता है. अगर यह तार्किक नहीं है तो श्री श्‍याम की पत्रकारिता के सिलसिले में उपस्थित होना कोई अपराध नहीं है. इस मामले में पुलिस वैज्ञानिक और तार्किक जांच करने के बजाय यांत्रिक जांच की है. इंटेंशन ही किसी अपराध को स्‍थापित करता है. यह श्री श्‍याम के मामले में कहीं भी जाहिर नहीं होता है. बावजूद पुलिस अपनी बचकानी जांच से प्रफुल्लित है और इसे न्‍यायालय के आदेश से गिरफ्तारी बता कर पत्रकारों को मूर्ख बना रही है. पुलिस ने ही बगैर वैज्ञानिक और तार्किक जांच किये यांत्रिक और बचकानी जांच के आधार पर श्री श्‍याम की गिरफ्तारी का परवाना जारी करने का मुख्‍य न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी, पटना को अनुरोध पत्र लिखा था और अब अपना थू-थू होते देखकर अपनी गलतियों को न्‍यायालय के मत्‍थे डालना चाह रही है. पत्रकारों की गोलबंदी देख कर अब पुलिस के आला
अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है और वचन दिया है कि इस मामले का पर्यवेक्षण वे स्‍वयं करेंगे तथा 27 दिसम्‍बर तक की मोहलत मांगी है।

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए चन्‍द विरोधी लोग पत्रकारों को नीतीश सरकार से लड़वाना चाहते हैं. ऐसे लोग चन्‍द अकर्मण्‍य, षडयंत्रकारी पुलिस अधिकारियों से मिलकर साजिश के तहत श्री श्‍याम को गिरफ्तार करवाने में सफल रहे हैं ताकि श्री श्‍याम का राष्‍ट्रीय पत्रकार संगठन के प्रदेश अध्‍यक्ष होने के कारण पटना से दिल्‍ली तक के पत्रकार नीतीश सरकार के खिलाफ आंदोलित होवें. लेकिन हम संयम से काम ले रहे हैं और श्री एसएन श्‍याम की गिरफ्तारी की घोर निन्‍दा करते हुए पुलिस के कृत्य की भर्त्‍सना करते हैं तथा प्रशासन और राज्‍य सरकार से मांग करते हैं कि श्री एसएन श्‍याम पर से झूठा मामला वापस ले. इसके अलावा उत्‍साह दिखाने वाली पुलिस की जिम्‍मेवारी तय कर दोषी को सजा सूचित किया जाना चाहिए अन्‍यथा हम पत्रकार और नागरिक आंदोलित होंगे जिसकी सारी जिम्‍मेवारी पुलिस की होगी।

हमने यह तय किया है कि वरीय पत्रकार एसएन श्‍याम की गिरफ्तारी और पुलिस की कार्यशैली के विरोध में दिनांक 29 दिसम्‍बर 2013 को दिन के 10 बजे गांधी
मैदान के दक्षिण में स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा के नीचे एक दिवसीय धरना देंगे. इसके अलावा मामले को जनलोक में लाने के लिए विरोध मार्च का भी आयोजन करेंगे. यह विरोध मार्च गांधी मैदान के दक्षिण स्थित लोक नायक जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा से आयकर गोलम्‍बर में स्थित उनकी ही प्रतिमा स्‍थल तक जायेगी. लोक नायक के दो चेलों की सरकार ही बिहार में विगत 33 वर्षों से काबिज है. क्‍या आपात काल के विरुद्ध जनता को गोलबंद करने वाले जयप्रकाश के शिष्‍य नीतीश कुमार लोकतंत्र के चौथे स्‍तम्‍भ के रखवाले पत्रकार की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज नहीं उठायेंगे. अगर आप खामोश रहोगे तो लोक नायक की आत्‍मा कलपेगी और जनता आप को नहीं बख्‍सेगी. आपात काल से भी बदतर दिन आने के विरोध में ही हमने जय प्रकाश से जय प्रकाश तक की विरोध यात्रा करने की ठानी है. आप सभी पत्रकार और नागरिकों से निवेदन है कि दिनांक 29 दिसम्‍बर 2013 को दस बजे दिन में पटना गांधी मैदान से दक्षिण जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा स्‍थल पर अवश्‍य जुटें और अपनी चट्टानी एकता का परिचय दें.

डा. देवाशीष बोस
Dr. Debashish Bose
प्रदेश महासचिव
General Secretary
वर्किंग जर्नलिस्‍ट यूनियन ऑफ बिहार
Working Journalist Union of Bihar


मूल खबर:

फर्जीवाड़े में पटना के वरिष्ठ पत्रकार एसएन श्याम गिरफ्तार

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