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लखनऊ

लोस चुनाव में क्यों बुरी तरह हारेगी सपा, बता रहे हैं हरे प्रकाश उपाध्याय

Hareprakash Upadhyay : 2014 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह से पराजय तय है। सपा कार्यकर्ता चहुँतरफा दबंगई और जोर-जबरदस्ती पर उतर आये हैं। प्रदेश सरकार की कथनी और करनी में जबरदस्त फर्क है। सरकारी धन का बुरी तरह अपव्यय हो रहा है। ग्रास रूट लेवल पर लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।

Hareprakash Upadhyay : 2014 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह से पराजय तय है। सपा कार्यकर्ता चहुँतरफा दबंगई और जोर-जबरदस्ती पर उतर आये हैं। प्रदेश सरकार की कथनी और करनी में जबरदस्त फर्क है। सरकारी धन का बुरी तरह अपव्यय हो रहा है। ग्रास रूट लेवल पर लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।

ढपोरशंखी घोषणाओं के कारण कुछ लोगों को लग रहा है कि सरकार अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण कर रही है, पर व्यावहारिक रूप से अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों का बुरा हाल है। सरकार जिन लोगों को ऑब्लाइज्ड और एडजस्ट कर रही है, उनमें अधिकांश का कोई जनाधार नहीं है। वे लोकप्रिय नेता नहीं हैं।

सपा सुप्रीमो कहते हैं कि पार्टी गुंडई करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगी पर दबंगों, अपराधियों और भ्रष्टाचारियों एवं उनके सगे-संबधियों को पार्टी चुन-चुनकर टिकट दे रही है। आपराधिक प्रवृति के बहुत सारे लोग प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में हैं। कुछ लोगों को परिस्थिति वश बाहर भी किया गया, तो बहाने से पुनः तुरंत शामिल कर लिया गया। सपा प्रमुख प्रदेश सरकार और अपनी पार्टी के बारे में उलटबांसी कर स्वयं विपक्ष का क्रेडिट भी पाने की कोशिश कर रहे हैं, पर जनता सब समझ रही है बॉस…हालात बहुत बुरे हैं…।

सपा प्रमुख 2012 के बाद जनाकांक्षा को समझने में भारी भूल कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी की शानदार विजय के बावजूद वे जनलोकपाल का विरोध कर रहे हैं, उन्हें क्या पता नहीं कि आम आदमी पार्टी जनलोकपाल के लिए किये आंदोलन के प्रतिफल के रूप में ही जीत कर आयी है? मजफ्फरनगर कांड ने तो अल्पसंख्यकों का सपा के प्रति अविश्वास बढ़ाया ही, वहां राहत शिविरों में बदइंतजामी उस अविश्वास को और पुख्ता कर रही है….।

सपा प्रमुख शायद भूल रहे हैं कि 2012 में सपा की विजय के पीछे मायावती शासन की अराजकता और भ्रष्टाचार को लेकर अखिलेश यादव का जबरदस्त आंदोलन, उनकी साफ-सुथरी छवि और अपराधियों और भ्रष्टाचारियों से किनारा करने की उनकी प्रवृत्ति रही, सत्ता मिलने के बाद जिसका सत्यनाश हो गया…

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हरे प्रकाश उपाध्याय के फेसबुक वॉल से. भड़ास तक अपनी बात [email protected] पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.


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