Hareprakash Upadhyay : 'आप' के बिन्नी भले आज मान गये हों, पर अगर कांग्रेस और भाजपा 'आप' को थोड़ा वक्त और अवसर दें, तो यह साफ होने में शायद बहुत ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी कि दिल्ली की नई सरकार भी मूलतः 'शिव की बारात' है। 'आप' के टिकट पर प्रायः एनजीओ वाले या विभिन्न दलों के ऐसे महत्वाकांक्षी युवा कार्यकर्ता जीत कर आ गये हैं जो हवा का रुख समझने में माहिर हैं।
ये लोग मूलतः करियरिस्ट लोग हैं, इनके पास कोई स्पष्ट विचारधारा या संघर्ष की परंपरा नहीं है। ये बहुत ज्यादा देर धैर्य नहीं रख सकते। जल्दी ही स्वार्थों का आपसी महासमर देखने को मिले तो आपको आश्चर्य नहीं होना चाहिये। पर फिलहाल कांग्रेसियों और भाजपाइयों के लिए थोड़े धैर्य की जरूरत है वरना दिल्ली में उनकी हवा और ज्यादा खराब हो सकती है।
लखनऊ के पत्रकार और साहित्यकार हरे प्रकाश उपाध्याय के फेसबुक वॉल से.
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