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जीएनएन न्‍यूज में आंतरिक घमासान तेज, कांग्रेस का भोंपू बना चैनल

चिटफंडियां कंपनी जीएन ग्रुप का चैनल जीएनएन न्‍यूज फिर कुचर्चा में है. खबर है कि कंसल्टिंग एडिटर अमिताभ भट्टाचार्य के इस्‍तीफा देने के बाद चैनल के भीतर की उठापटक जोरों पर है. कर्मचारियों को चैनल का कोई माई-बाप नजर नहीं आ रहा है. चैनल से जुड़े लोगों का कहना है कि यह चैनल कांग्रेस का भोंपू बन चुका है और एंटी-बीजेपी हो गया है. संतुलित खबरें दिखाने की परिपाटी खत्म हो गई है. चैनल पर बायस्‍ड होकर खबरें दिखाई जा रही हैं.

चिटफंडियां कंपनी जीएन ग्रुप का चैनल जीएनएन न्‍यूज फिर कुचर्चा में है. खबर है कि कंसल्टिंग एडिटर अमिताभ भट्टाचार्य के इस्‍तीफा देने के बाद चैनल के भीतर की उठापटक जोरों पर है. कर्मचारियों को चैनल का कोई माई-बाप नजर नहीं आ रहा है. चैनल से जुड़े लोगों का कहना है कि यह चैनल कांग्रेस का भोंपू बन चुका है और एंटी-बीजेपी हो गया है. संतुलित खबरें दिखाने की परिपाटी खत्म हो गई है. चैनल पर बायस्‍ड होकर खबरें दिखाई जा रही हैं.

सूचना है कि पॉलिटिकल एडिटर मारुफ रजा ने चैनल हेड की भूमिका निभानी शुरू कर दी है. इनके हेड बनते ही गुटबाजी तेज हो गई है. बताया जाता है कि इन्‍होंने इनपुट हेड संदीप सिन्‍हा को हटाकर योगेश गुलाटी को नया इनपुट हेड बना दिया है. फ्रैंकलीन आउटपुट हेड बनाए गए हैं. सूत्रों के मुताबिक मारुफ रजा ने इस चैनल को एंटी-बीजेपी मोड में डाल दिया है. एकतरफा खबर दिखाने के कारण बीजेपी के नेता इस चैनल पर फोनो तक देने से बच रहे हैं.

बताया जा रहा है कि हिमांशु ने सेलरी आने के बाद चैनल छोड़ दिया है. वे बीते 28 दिसम्‍बर से कार्यालय नहीं आ रहे. उन्‍होंने कहीं ज्‍वाइन किया है या नहीं, पता नहीं चल पाया है. सूत्रों का कहना है कि हिमांशु खुद अपने बिछाए जाल में फंस गए. राघवेश अस्‍थाना के दौर में हिमांशु ने चेयरमैन रधांवा के खास बजाज के सहयोग से मारुफ को आगे बढ़ाया ताकि अस्‍थाना को किनारे लगवाया जा सके. मारुफ रजा ने इस योजना को अंजाम तक पहुंचाया. बाद में प्रबंधन से अनबन होने के बाद अस्‍थाना ने इस्‍तीफा दे दिया.

इसके बाद प्रबंधन ने अपनी डूबती नैय्या को सहारा देने के लिए अमिताभ भट्टाचार्य को फिर से कंसल्टिंग एडिटर बना दिया. महत्‍वाकांक्षी मारुफ रजा एंड कंपनी ने प्रबंधन को तमाम तरह के लॉलीपॉप देकर हिमांशु को किनारे लगाने की रणनीति शुरू कर दी. चैनल की लांचिंग से पहले से जुड़े हिमांशु प्रबंधन की नजर में खटकने लगे. कई चीजों को लेकर इन लोगों के बीच आंतरिक टकराव शुरू हो गया. अंतत: हिमांशु ने चैनल में आना बंद कर दिया. हिमांशु से बात करने की कोशिश की गई परन्‍तु सफलता नहीं मिल पाई.

हिमांशु को निपटाने के बाद आखिरकार अमिताभ को भी निपटा दिया गया. बताया जा रहा है कि उन्‍हें इस कदर मजबूर किया गया कि वे खुद चले गए. इसके बाद अब मारुफ रजा एंड कंपनी का राज हो गया है. चैनल को लेकर प्रबंधन के रवैये को देखकर ऐसा नहीं लगता कि अब वह किसी नए चैनल हेड को लाने की कोशिश करेगी. सूत्रों के मुताबिक फिलहाल चैनल एंटी बीजेपी मोड में है. एक पक्षीय खबरें दिखाई जाने लगी हैं. ऐसा लग रहा है जैसे यह चैनल कांग्रेस का भोंपू बन गया है.  कर्मचारियों को समझ में नहीं आ रहा कि वे किस तरह से काम करें.

चेयरमैन रंधावा को अपने चिटफंड के धंधे से ही फुर्सत नहीं इसलिए वह चैनल पर ध्‍यान नहीं दे पा रहे. इससे स्थिति और विकट हो गई है. सूत्रों का कहना है कि चैनल को टेली मार्केटिंग के कुछ विज्ञापन मिले थे, इसमें भी घपला किए जाने की बात है. कहने वाले यहां तक कहते हैं कि इसी गोरखधंधे के पैसे से चैनल से जुड़े कुछ लोगों ने नई गाडि़यां भी खरीदी हैं.

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