Saleem Akhter Siddiqui : हैरत की बात है कि सपा के मुसलिम चेहरा आजम खान मुजफ्फरनगर दंगों पर अब तक ‘तटस्थ’ बने हुए हैं। मुझे याद है, जब 1987 में मलियाना में पीएसी ने कहर बरपाया था, तो यही आजम खान बार-बार मलियाना आते थे। इसके बावजूद भी आते थे, जब उन पर मेरठ में घुसने पर पाबंदी लगी हुई थी। छुप-छुपकर आते थे।
यदि मुजफ्फरनगर दंगा बसपा, भाजपा या कांग्रेस के शासनकाल में हुआ होता, तो क्या तब भी आजम खान ऐसे ही तटस्थ रहते? मुलायम सिंह के हालिया बयान पर पर भी उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।
मेरठ के पत्रकार सलीम अख्तर सिद्दीकी के फेसबुक वॉल से.





