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लखनऊ

आईपीएस अफसरों की जाति का महत्व

लखनऊ : आईपीएस अफसरों की जाति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार अपने अभिलेखों में दो तरह की बातें करती दिखती है. आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अप्रैल 2011 में खुद को सरकारी अभिलेखों में कास्टलेस (जाति-विहीन) कहे जाने के लिए आवेदन दिया. लम्बे समय तक इस पर फैसला नहीं आने पर उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इस सम्बन्ध में मुक़दमा भी किया है.

लखनऊ : आईपीएस अफसरों की जाति को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार अपने अभिलेखों में दो तरह की बातें करती दिखती है. आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अप्रैल 2011 में खुद को सरकारी अभिलेखों में कास्टलेस (जाति-विहीन) कहे जाने के लिए आवेदन दिया. लम्बे समय तक इस पर फैसला नहीं आने पर उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इस सम्बन्ध में मुक़दमा भी किया है.

आरटीआई कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा प्राप्त गृह विभाग की सम्बंधित पत्रावली में कहा गया है कि आईपीएस अफसरों की ग्रेडेशन लिस्ट और शासकीय अभिलेखों में जाति नहीं लिखी जाती है और उनकी पदोन्नति, ट्रांसफर आदि जाति के आधार पर संपन्न नहीं किये जाते हैं, मात्र सेवा में आते समय अभिलेखों में ये अधिकारी “स्वयं ही” अपनी कास्ट अंकित करते हैं. इस आधार पर श्री ठाकुर को कास्टलेस लिखे जाने का कोई औचित्य नहीं माना गया.

इसके विपरीत अन्य आरटीआई सूचना के अनुसार शासन और डीजीपी कार्यालय में प्रयुक्त आईपीएस अफसरों के बायोडाटा में प्रत्येक अधिकारी की जाति प्रमुखता से अंकित होती है. डॉ ठाकुर ने कहा है कि मुख्य बायोडाटा में जाति लिखे जाने से स्पष्ट है कि इन अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग सहित अन्य मामलों में उसका ख़ास स्थान रहता है जिस बात को अमिताभ ठाकुर की पत्रावली में झुठलाया गया है.

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