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विनोद कापड़ी ने फिल्म शूटिंग के लिए गांव वालों को पुलिस के जरिए डराया-धमकाया…

Yashwant Singh : विनोद कापड़ी नामक पत्रकार लगता है पुलिस की बैसाखी से ही जिंदा है… भैंस से रेप पर एक फिल्म बनाने वाले विनोद कापड़ी के बारे में एक नई कहानी सामने आ रही है.. वो ये कि जब वो फिल्म की शूटिंग वेस्ट यूपी के रसूलपुर गांव में कर रहे थे तो वहां के युवा और क्रांतिकारी ग्राम प्रधान करमवीर ने आपत्ति की कि उनकी बिना इजाजत के गांव में कैसे शूटिंग हो रही है..

Yashwant Singh : विनोद कापड़ी नामक पत्रकार लगता है पुलिस की बैसाखी से ही जिंदा है… भैंस से रेप पर एक फिल्म बनाने वाले विनोद कापड़ी के बारे में एक नई कहानी सामने आ रही है.. वो ये कि जब वो फिल्म की शूटिंग वेस्ट यूपी के रसूलपुर गांव में कर रहे थे तो वहां के युवा और क्रांतिकारी ग्राम प्रधान करमवीर ने आपत्ति की कि उनकी बिना इजाजत के गांव में कैसे शूटिंग हो रही है..

ग्राम प्रधान का कहना था कि शूटिंग के लिए परमीशन लेते, तब फिल्म निर्माण करते… इसको लेकर काफी बवाल हुआ… विनोद कापड़ी ने अपनी आदत के मुताबिक पुलिस की बैसाखी थामी और गांव वालों को परेशान करना शुरू कर दिया… गांव वालों को डरा धमका कर चुप कराया और पुलिस के पहरे में शूटिंग पूरी कर भाग आया…

बताया जाता है कि शूटिंग के दौरान गांव वालों ने विनोद कापड़ी का बाजा बजाकर रख दिया था… ज्ञात हो कि ये वही गांव रसूलपुर है जहां संत गंगा दास का जन्म हुआ था.. संत गंगा दास ने रानी लक्ष्मी बाई का दाह संस्कार किया था ग्वालियर में… यह रसूलपुर गांव हापुड़ से करीब 20 किलोमीटर आगे है गढ़ मुक्तेश्वर की ओर…

पुलिस प्रशासन के बल पर कभी भड़ास टीम को परेशान, प्रताड़ित व जेल भिजवाने वाले और अब गांव वालों को परेशान करने वाले विनोद कापड़ी को लेकर लोग कहने लगे हैं कि ये सचमुच पत्रकार है या गल्ती से पत्रकारिता में आ गया है… सच्चा पत्रकार पुलिस, फौज, आतंक के जरिए नहीं बल्कि कलम व जुबान से बात करता, समझाता, विरोध दर्ज कराता, प्रतिवाद करता, कनवींस करता है…

वैसे, कहने वाले कह रहे हैं कि अगर विनोद कापड़ी की मानसिक दशा ऐसी न होती तो आज वह हाशिए के एक छोटे-मोटे न्यूज चैनल में नौकरी न कर रहा होता… कभी स्टार न्यूज और इंडिया टीवी में काम कर चुके विनोद कापड़ी को इन्हीं हरकतों और मानसिक स्थितियों के कारण इन न्यूज चैनलों की नौकरी से जाना पड़ा और आज गुमनामी में जाकर गुमनाम से चैनल में रोजी-रोटी का जुगाड़ करना पड़ रहा है…

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


उपरोक्त पोस्ट पर आईं कुछ टिप्पणियां इस प्रकार हैं…

Rajeev Gupta कानून तोड़ने में भी माहिर है,ऐसा लगता है। पत्रकारिता तो धौंस जमाने के लिये बहुतेरे लोग कर रहे हैं।
 
Madan Tiwary लतखोर है। दिखाने के लिये गंभीरता धारण किये रहता है। इसको मेरे जैसा आदमी चाहिये। चार बार मारो एक बार गिनो।
 
Qasim Chaudhary Maine apni aankho se uss gaanw ke logo par kiya gaya zulm dekha hai, jo haramkhor police walo ne kiya tha?
 
Yashwant Singh कृपया तफसील से बताएं Qasim Chaudhary भाई.. क्या क्या हुआ था… इस मुद्दे को उठाना चाहिए कि आखिर एक संपादक स्तर का आदमी कैसे पुलिस के जरिए गांव वालों को प्रताड़ित करता है, वह भी फिल्म बनाने के नाम पर… अगर हम सब ऐसे ही चुप रह जाएंगे तो ये बड़े लोग जुल्म करते रहेंगे.. इन्हें सबक सिखाना जरूरी है.. इन्हें नंगा करना जरूरी है.. इन्हें शर्म दिलाने के लिए आवाज उठाना जरूरी है…

Padmasambhava Shrivastava यह विनोद कापड़ी कैसा तोप है जिससे पुलिस महकमा काँपता है ?
 
Rita Das ye mera gaaaoooo hhai…koi prob. ho to kahiye, hujur…sab intajaam ho jayega….
 
Prashant Mishra What you are doing is Yellow Journalism, Mr Yashwant … We all know how things are set up amd achieved in adverse comditions, it's just that u have been hooked up in the past by that person u are trying to create a negative impression of him … Everybody keeping interest in media and following media personels know what " Vinod Kapdi " is … !! being a so called Journalist, atleast wht u think of urself , you should present the both sides of the coin, According to 19(a) of constitution, Freedom of expression is there and by shooting a film dere in that place inside national boundaries he was doing nothing wrong with it , It was Pradhans, who were showing their might and unity to make him struggle for the project, for which he turned to police protection … !!!
 
Yashwant Singh प्रशांत भइया, किसी को गलत फंसाओगे तो वो आपकी आरती थोड़े उतारेगा… और, किसी के गांव में घुसकर बिना गांव वालों को भरोसे में लिए ….एक्शन कट स्टार्ट.. करोगे तो वो तो पूछेगा कि भइया इ का हुई रहा है… खैर… आप की अंग्रेजी बड़ी तगड़ी है… डर लागे राजा तोहरे संविधनवा से… 🙂

Anil Sakargaye देखो मिश्रा जी आपने जो लिखा …अपुन ने पढ़ा …थोड़ा समझा भी। ये यल्लो यलो जर्नलिस्म का ठीकरा हमारे जिम्मे क्यों? सुनो प्रभु … ज्ञान अंग्रेजी का भले हो … हिसाब यही होगा … गुरु अँगरेज़ से लगाकर अलामा , नेपोलियन थक गए … सच्ची बात करो …हमे पता है …घर में भले इंग्लिश बोलो, पर बच्चे हिंदी में ही समझते हैं…

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