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पहले लोग मिशन की खातिर काम करते थे, अब कमीशन के लिए

: आना वाला समय सिटीजन जर्नलिज्म का :  रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद प्रकाश जावडेकर का कहना है कि प्रिट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के विस्तार के बाद आने वाला समय सिटीजन जर्नलिज्म का है। वे यहां जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के पांच साल पूरे होने पर रायपुर में मीडिया और लोकतंत्र विषय पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। वृंदावन हाल में आयोजित इस समारोह में मीडिया विमर्श के वार्षिकांक का विमोचन किया गया।

: आना वाला समय सिटीजन जर्नलिज्म का :  रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद प्रकाश जावडेकर का कहना है कि प्रिट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के विस्तार के बाद आने वाला समय सिटीजन जर्नलिज्म का है। वे यहां जनसंचार के सरोकारों पर केंद्रित त्रैमासिक पत्रिका मीडिया विमर्श के पांच साल पूरे होने पर रायपुर में मीडिया और लोकतंत्र विषय पर एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। वृंदावन हाल में आयोजित इस समारोह में मीडिया विमर्श के वार्षिकांक का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्यअतिथि की आसंदी से बोलते हुए जावडेकर रोचक शैली में कई गंभीर बातें कहीं। मसलन पहले वे चार अखबार चार घंटे में पढ़ पाते थे किंतु अब चालीस अखबार चालीस मिनट में पढ़ लेते हैं। उनका कहना था कि अब न्यूज और व्यूज में कोई अंतर नहीं दिखता। पहले लोग मिशन की खातिर काम करते थे और अब कमीशन के लिए। सबसे पहले खबर दिखाने की होड़ का हाल ऐसा कि कुछ उत्साही तो खबर घटने से पहले ही दिखा देते हैं। प्रिंट में अब मात्र प्रिंट लाइन ही वह स्थान बचा है जहां प्रकाशन संबंधी सूचना होती है। शेष पूरे स्थान पर पेड न्यूज का बोलबाला होता है।

जावडेकर ने कहा कि इस संबंध में सिर्फ प्रेस ही दोषी नहीं है जो पैसे देकर खबरें छपवा रहे हैं वह भी दोषी हैं। सजा दोनों को मिलनी चाहिए। ट्विटर, फेसबुक जैसे माध्यमों की लोकप्रियता और उसके माध्यम से खबरों के एक नए संसार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है तथा आने वाले समय में यह सिटीजन जर्नलिज्म सामाजिक जीवन में एक बड़ी भूमिका अदा करेगा। सत्ता वर्ग देश-विदेश दोनों में इसके असर को देख चुका है।

मीडिया ही लोकतंत्र की आत्माः जावडेकर ने कहा कि मीडिया ही लोकतंत्र की आत्मा है। आज मीडिया जिस दिशा में जा रहा है, उसे उस पर सोचना और विचार करना अत्यंत आवश्यक है। मीडिया का परिदृश्य पहले की तुलना में काफी बदल गया है। प्रेस की आजादी का समर्थन करते हुए जावडेकर ने कहा कि मीडिया पर किसी तरह की पाबंदी नहीं होनी चाहिए। आपातकाल की याद दिलाते हुए उनका कहना था कि हमने प्रेस की आजादी की जंग लड़ी है और उसके लिए जेल भी गए हैं। लोकतंत्र का मतलब ही है भिन्न-भिन्न राय। यानि मैं आपकी राय से सहमत नहीं हूं फिर भी आपको आपकी बात कहने का पूरा हक है। जावडेकर ने कहा कि इस सबके बावजूद जिस तरह के खतरे उपस्थित हैं उसमें मीडिया के लिए यह जरूरी है कि वह अपना स्व-नियंत्रण करे और सरकार को बंदिशें लगाने के अवसर न दे।

सामाजिक संवाद जरूरीः कार्यक्रम के मुख्यवक्ता माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने पत्रकारिता की तुलना लेंस से की जो कभी किसी चीज को छोटा, कभी बड़ा तो कभी जला देता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र में सामाजिक संवाद बहुत जरूरी है और नया मीडिया इसे संभव बनाता है। न्यू मीडिया अपने स्वभाव में ज्यादा लोकतांत्रिक है। कार्यक्रम में कृषि मंत्री चंद्रेशेखर साहू, लेखिका जया जादवानी,, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति डा. सच्चिदानंद जोशी. पत्रिका के संपादक डा. श्रीकांत सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने की।

पत्रकार एवं लेखक हुए सम्मानितः  इस मौके पर छत्तीसगढ़ के लेखक और पूर्व आईएएस अधिकारी डा. सुशील त्रिवेदी, जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ के रिपोर्टर विश्वेश ठाकरे, बस्तर के पत्रकार सुरेश रावल, सृजनगाथा डाट काम के संपादक जयप्रकाश मानस, मीडिया शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए डा. गोपा बागची को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर, बसंतकुमार तिवारी, बबन प्रसाद मिश्र, हरिभूमि के प्रबंध संपादक हिमांशु द्विवेदी, नई दुनिया के महाप्रबंधक मनोज त्रिवेदी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष सुभाष राव, वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय,हज कमेटी के अध्यक्ष डा. सलीम राज, जी 24 घंटे छत्तीसगढ़ के निदेशक दिनेश गोयल, सीईओ केके नायक, एच आर हेड निवेदिता कानूनगो, फाइनेंस हेड गिरिराज गर्ग, विवेक पारख, शताब्दी पाण्डेय, बस्तर के भाजपा नेता संजय पाण्डेय मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डा. सुभद्रा राठौर ने तथा आभार प्रदर्शन प्रभात मिश्र ने किया। अंत में अतिथियों को प्रतीक चिन्ह कार्यकारी संपादक संजय द्विवेदी ने भेंट किए।

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