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नहीं दिलाई दवाई, नतीजे में नौकरी गंवाई!

अंबाला : आज समाज, अंबाला के जींद संस्करण देखने वाले उप संपादक रवि कुमार का आरोप है कि उन्होंने डीएनई के कहे मुताबिक दवा खरीदकर नहीं दी तो उसकी नौकरी ले ली गई. रवि ने एक लिखित पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि वह दो माह से अंबाला यूनिट में बतौर उपसंपादक काम कर रहे थे, लेकिन डीएनई के स्तर पर कार्रवाई लंबित रहने के कारण उन्हें तनख्वाह नहीं मिली तो आला अफसरों से गुहार लगाई. इसके बाद आधी-तिहाई सैलरी मिल गई, लेकिन अगले माह यह स्थिति फिर आई तो आला अफसर विवशता जताने लगे.

अंबाला : आज समाज, अंबाला के जींद संस्करण देखने वाले उप संपादक रवि कुमार का आरोप है कि उन्होंने डीएनई के कहे मुताबिक दवा खरीदकर नहीं दी तो उसकी नौकरी ले ली गई. रवि ने एक लिखित पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि वह दो माह से अंबाला यूनिट में बतौर उपसंपादक काम कर रहे थे, लेकिन डीएनई के स्तर पर कार्रवाई लंबित रहने के कारण उन्हें तनख्वाह नहीं मिली तो आला अफसरों से गुहार लगाई. इसके बाद आधी-तिहाई सैलरी मिल गई, लेकिन अगले माह यह स्थिति फिर आई तो आला अफसर विवशता जताने लगे.

रवि के मुताबिक एक दिन वे साप्ताहिक अवकाश पर थे. रात 9  बजे आफिस से डीएनई आशुतोष ने फोन करके एक दवा खरीदकर रखने को कहा. देर रात 12 बजे रवि के घर पहुंचकर डीएनई ने दवा मांगी तो रवि ने तंगहाली का हवाला देते हुए बताया कि दवा नहीं खरीदी है. इसके बाद डीएनई ने घर के बाहर रवि को बेइज्जत करते हुए शेष सैलरी के लिए तरसाने की धमकी तक दे डाली.

रवि का कहना है कि उन्होंने इस बेइज्जती को बर्दाश्त करते हुए सैलरी के लिए हाथ-पैर मारे, लेकिन अंबाला के एक आला अधिकारी के आश्वासन के बावजूद उसे फिर आधी सैलरी ही मिली. रवि ने डीएनई से शेष सैलरी के लिए आग्रह किया तो उन्होंने एक बार फिर बेइज्जत किया और दवा नहीं खरीदने की गलती को याद दिलाया. इसके बाद रवि ने संस्थान छोड़ने में ही अपनी भलाई समझी और वह नौकरी को लात मारकर अपने गृह राज्य बिहार लौट गए.

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