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जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर को बड़ा झटका, एक साथ पांच रिपोर्टरों ने दिया इस्तीफा

गोरखपुर : जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर को सोमवार की सुबह एक बड़ा झटका लगा. ये झटका संस्थान को तब लगा जब यहां एक साथ पांच रिपोर्टरों ने संस्‍थान को टाटा-बाय-बाय कर दिया. 
गोरखपुर : जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर को सोमवार की सुबह एक बड़ा झटका लगा. ये झटका संस्थान को तब लगा जब यहां एक साथ पांच रिपोर्टरों ने संस्‍थान को टाटा-बाय-बाय कर दिया. 
खबर है कि वेतन समय पर न मिलने और संपादक एवं सिटी इंचार्ज द्वारा मानसिक दबाव बनाने के कारण रिपोर्टरों द्वारा यह फैसला लिया गया. हालांकि एक दिन पहले तक वह पूरी तन्‍मयता के साथ अपनी जिम्‍मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे.
जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर के तेज-तर्रार रिपोर्टर माने जाने वाले संतोष गुप्‍ता, उत्‍तम दुबे, नीरज श्रीवास्‍तव, सुनील त्रिगुणायत और स्‍वाति श्रीवास्‍तव ने सोमवार को संस्‍थान से अपना नाता तोड़ लिया. वहीं संस्‍थान को इस बात का डर सता रहा था कि नवंबर माह पूरा होते ही रिपोर्टर वेतन के लिए दबाव बनाने लगेंगे. पूर्व सिटी इंचार्ज सहित जिले के 11 लोगों के संस्‍थान छोडने के बाद से नये नवेले संपादक एवं सिटी इंचार्ज को इस बात का डर था कि नवंबर का वेतन मिलते ही ज्‍यादातर लोग संस्‍थान को टाटा कर सकते है. इसी कारण संस्‍थान द्वारा दिसंबर माह खत्‍म होने की कगार पर होने के बाद भी वेतन नहीं दिया गया था. दो माह का वेतन नहीं मिलने के बाद भी सभी लोग पूरी तन्‍मयता के साथ काम कर रहे थे.
 
किसी के संस्‍थान छोडकर जाने की बात नहीं थी लेकिन नए संपादक और इंचार्ज पिछले 15-20 दिनों से रिपोर्टरों व डेस्‍क के लोगों पर दबाव बनाने के लिए माहौल बना रहे थे कि जिसे छोडकर जाना है वह जा सकता है उसका हिसाब-किताब कर दिया जाएगा. इसके पीछे एक कारण यह भी है कि पीएफ व अन्‍य बकाया होने के कारण संस्‍थान के अधिकारी भारी दबाव में हैं. यह देखने के लिए कि कोई छोडकर जाने वाला तो नहीं है इसलिए इस प्रकार का माहौल बनाया जा रहा था जिससे जाने वाले लोगों को चिह्रनित किया जा सके. जब यह बात साफ हो गई कि कोई छोडकर जाने वाला नहीं है तो अनायास ही काम करने वाले रिपोर्टरों को ही बातों के मायाजाल में फंसाकर प्रताड़ित किया जाने लगा. नतीजा पिछले 15-20 दिनों से भारी दबाव में काम कर रहे पांचों रिपोर्टरों ने संस्‍थान को टाटा-बाय-बाय कह दिया. जबकि संपादक व सिटी इंचार्ज को इसका जरा भी एहसास नहीं था कि उनके अनावश्‍यक दबाव का खामियाजा उन्‍हें पांच रिपोर्टरों की कीमत देकर चुकाना पडेगा. आनन-फानन में कुछ नए लोगों को भर्ती करने के लिए संपादक व सिटी इंचार्ज ने हाथ-पांव मारना शुरू किया लेकिन वेतन नहीं मिलने के डर से कोई भी डूबती नाव में बैठने को तैयार नहीं होना चाहता है. भई जनसंदेश टाइम्‍स गोरखपुर की नैया अब डूबी ही समझो क्‍योंकि पीएफ अधिकारी कभी भी संस्‍थान में ताला जड़ सकते हैं.  
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