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उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और राज्यपाल ने संवैधानिक गरिमा को ताक पर रखा

स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य स्वर्गीय रणबीर सिंह की 100वीं जयंति पर एमडीयू रोहतक में रणबीर सिंह शोधपीठ द्वारा आयोजित एक समारोह में जहां मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो अपने पिता को देवता बताया ही, वहीं देश और प्रदेश के संवैधानिक पदों पर बैठे हरियाणा के राज्यपाल महामहिम जगन्नाथ पहाडिया और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा की तारीफ के पुल बांधते हुए अपने पदों की मर्यादा को भी ताक पर रख दिया.
स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य स्वर्गीय रणबीर सिंह की 100वीं जयंति पर एमडीयू रोहतक में रणबीर सिंह शोधपीठ द्वारा आयोजित एक समारोह में जहां मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो अपने पिता को देवता बताया ही, वहीं देश और प्रदेश के संवैधानिक पदों पर बैठे हरियाणा के राज्यपाल महामहिम जगन्नाथ पहाडिया और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा की तारीफ के पुल बांधते हुए अपने पदों की मर्यादा को भी ताक पर रख दिया.
राज्य के गर्वनर पहाडिया साहब ने हुड्डा की सरकार के विकास कार्यों की आलोचना करने वाले उनके राजनीतिक विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा कि हालांकि ये उनका विषय नहीं है लेकिन जो लोग हरियाणा में विकास के बारे में भ्रांति फैला रहे हैं वे हरियाणा में आकर देखें, उनकी आंखें खुल जाएंगी.
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने रणबीर सिंह को कुशल प्रशासक बताते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि रणबीर सिंह के बेटे हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और उनके पोते यानि दीपेंद्र हुड्डा जो रोहतक से सांसद हैं. रणबीर सिंह के दिखाए रास्ते पर चलकर उनकी जनकल्याण की नीतियों की हरियाणा में पालन कर रहे हैं. अब राज्यपाल पहाडिया साहब द्वारा हुड्डा की चापलूसी करने की बात तो समझ में आती है क्योंकि हुड्डा सरकार ने पहाडिया साहब को ओब्लाइज कर रखा है. हामिद अंसारी द्वारा दीपेंद्र हुड्डा तक की चापलूसी करना समझ में नहीं आता, हालांकि दीपेंद्र हुड्डा उस समय समारोह में मौजूद भी नहीं थे.
इस समारोह में मंच से कई बार कहा गया है कि ये खुशी की बात है कि आज रणबीर सिंह के जन्मदिन के अलावा शहीद उद्यम सिंह का जन्मदिन भी है लेकिन हुड्डा, पहाडिया और अंसारी ने उद्यम सिंह के बलिदान के बारे में एक शब्द भी कहना उचित नहीं समझा. याद दिला दें कि उद्यम सिंह ने जलियांवाला बाग में निर्दोश लोगों की हत्या के विरोध में इंग्लैंड जाकर जनरल डायर को गोली मार दी थी, लेकिन चूंकि उनके वंशज रणबीर सिंह के बेटे और पोते की तरह राजनीति में नहीं हैं इसलिए उन्होंने उनका नाम लेना उचित नहीं समझा. ये अलग बात है कि लोक संपर्क विभाग हरियाणा द्वारा अखबारों में उद्यम सिंह के बलिदान के बारे में विज्ञापन दिए गए थे लेकिन पूरे प्रदेश में कोई सरकारी समारोह नहीं किया गया. हालांकि हुड्डा ये कहते नहीं थकते कि वे स्वतंत्रा सेनानियों और शहीदों का सम्मान करते हैं. उनकी सरकार ने उन्हें कल्याण के लिए कई काम किए हैं. याद दिला दें कि उनके संरक्षण में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकार संगठन भी है जिसके अध्यक्ष उनके पिता रणबीर सिंह के दोस्त शीलबहादुर यायाजी के बेटे सत्यानंद यायाजी हैं. हुड्डा साहब ने सत्यानंद यायाजी को तो इतना बड़ा कालोनाइजर बना दिया कि उसने सोनिया गांधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा को गुडगांव में जमीन बेची लेकिन हुड्डा साहब प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी श्रीराम शर्मा की पुत्रवधु की मृत्यु पर रोहतक स्थित उनके निवास पर शोक प्रकट करने भी नहीं गए. यही नहीं हुड्डा साहब उन दिनों लाहली के क्रिकेट स्टेडियम में क्रिकेट का मैच देखते रहे लेकिन उनके पास स्वतंत्रता सेनानी के घर जाने का समय नहीं था. गौरतलब है कि श्रीराम शर्मा ने झज्जर के टाउनहाल से अंग्रेजों का झंडा उतार कर तिरंगा फहरा दिया था जिससे नाराज होकर अंग्रेज पुलिस ने उन्हें जीप से बांधकर पूरे झज्जर शहर में घसीटा था और लाल मिर्च की खाली बोरी में बंद कर दिया था. जवाहर लाल नेहरू उनका धन्यवाद करने रोहतक आए थे लेकिन चूंकि उनका कोई परिवार राजनीति में नहीं इसलिए सरकार उन्हें पूछती नहीं. कोर्ट से झाड़ खाने के बाद भी रोहतक के कैनाल रेस्ट हाउस के सामने रणबीर सिंह का स्टैच्यु लगाने की तैयारियां चोरी-छिपे चल रहीं हैं. जबकि चौ. चरण सिंह का स्टैच्यु हुड्डा के दोस्त योगेंद्र दहिया के घर पिछले कई साल से पड़ा है, उसके लिए  अभी तक कोई जगह नहीं मिल पायी है.
 
पवन कुमार बंसल
08882828301

 

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