Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

दिल्ली

आदरणीय केजरीवाल साहब, हमें आदत है बड़े लोगों को बड़े घरों में देखने की

Ashok Kumar Pandey : आदरणीय केजरीवाल साहब, सादर नमस्कार… हमें इस बात से सच में कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपनी रिहाइश कहाँ बनाएँगे. कमरे चाहे कितने हों आपके घर में या लोकेशन चाहे जो हो उसकी…फर्क नहीं पड़ता हमें. आदत है बड़े लोगों को बड़े घरों में देखने की. फर्क इस बात से पड़ता है कि कहीं आप इस पानी-बिजली वाली सब्सीडी को हम जैसों की जेब से न वसूलने लगें. कहीं आपके राज में भी दिल्ली वालों को घूस देकर काम न करवाना पड़े. कहीं आप उनके बीच रहते रहते उन जैसे न हो जाएँ.

Ashok Kumar Pandey : आदरणीय केजरीवाल साहब, सादर नमस्कार… हमें इस बात से सच में कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपनी रिहाइश कहाँ बनाएँगे. कमरे चाहे कितने हों आपके घर में या लोकेशन चाहे जो हो उसकी…फर्क नहीं पड़ता हमें. आदत है बड़े लोगों को बड़े घरों में देखने की. फर्क इस बात से पड़ता है कि कहीं आप इस पानी-बिजली वाली सब्सीडी को हम जैसों की जेब से न वसूलने लगें. कहीं आपके राज में भी दिल्ली वालों को घूस देकर काम न करवाना पड़े. कहीं आप उनके बीच रहते रहते उन जैसे न हो जाएँ.

मुझे आपसे बहुत उम्मीद नहीं है, पर वो हमारे आफिस वाले सिन्हा साहब, वो हमारे एक पुराने कामरेड और वह हमारे घर की सहायिका..इन सबको आपसे बड़ी उम्मीद है. इसीलिए जब यह रायल बैंक आफ स्काटलैंड की इण्डिया हेड मीरा सान्याल से लेकर बड़े बड़े लोग टोपी लगाए दिख रहे हैं तो मुझे डर लगता है कि कहीं सिन्हा साहब, कामरेड और हमारे घर की उम्रदराज़ सहायिका को इन टोपियों की क़ीमत न चुकानी पड़े.

जब आप मुजफ्फरनगर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, आपके साथी प्रशांत भूषन को सीपीएम से तो दिक्कत होती है पर कांग्रेस का समर्थन नहीं खलता…जब आपके लोग निजी बातचीत में पीएम के लिए साहेब की वक़ालत करते नज़र आते हैं और जब वह आपका कवि मित्र अपने बड़बोलेपन में अपनी भयावह स्त्रीविरोधी सामन्ती चुटकुलेबाजी पेश करता है तो उन लोगों को भले फर्क न पड़े पर मुझे डर लगता है. लेकिन मेरी छोड़िये…मेरा डर आपसे दूर नहीं हो सकता. हाँ … मारे आफिस वाले सिन्हा साहब, वो हमारे एक पुराने कामरेड और वह हमारे घर की सहायिका..इन सबको आपसे बड़ी उम्मीद है.

आपका
दिल्ली का एक ताजातरीन रहवासी

युवा साहित्यकार अशोक कुमार पांडेय के फेसबुक वॉल से.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...