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यूपी के डीजीपी बृजलाल और प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर हटाए गए

लखनऊ से खबर है कि डीजीपी बृजलाल और प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर को उनके पदों से हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों की शिकायत पर चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई की है. मुख्‍यमंत्री मायावती के खास लोगों में गिने जाने वाले दोनों अधिकारियों की शिकायत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से की थी तथा अंदेशा जताया था कि ये लोग अपने पदों का दुरुपयोग करके बसपा को चुनाव में फायदा पहुंचा सकते हैं.

लखनऊ से खबर है कि डीजीपी बृजलाल और प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर को उनके पदों से हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों की शिकायत पर चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई की है. मुख्‍यमंत्री मायावती के खास लोगों में गिने जाने वाले दोनों अधिकारियों की शिकायत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से की थी तथा अंदेशा जताया था कि ये लोग अपने पदों का दुरुपयोग करके बसपा को चुनाव में फायदा पहुंचा सकते हैं.

चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की शिकायत और इन अधिकारियों के पुराने कार्यप्रणाली को ध्‍यान में रखते हुए इन्‍हें इनके पदों से हटाए जाने का निर्देश जारी किया है. संभावना जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में चुनाव आयोग कई और दागी तथा बसपा के पक्ष में काम करने वाले अधिकारियों को हटा सकता है. सूत्रों का कहना है कि विपक्षी पार्टियों ने कई जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों की भी शिकायत की है, जिस पर चुनाव आयोग अपना निर्णय ले सकता है.

इधर बसपा का कहना है कि इन दोनों अधिकारियों को दलित होने के चलते हटाया गया है. बसपा का कहना है कि ये दोनों अधिका‍री दलित हैं इसलिए इनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई है. दूसरी तरफ बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने चुनाव आयोग द्वारा मायावती तथा हाथी की मूर्तियों को ढंके जाने के चुनाव आयोग के निर्देश के बाद लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस किया तथा इसे गलत बताया. मायावती की मूर्तियों को ढंकने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जताते हुए श्री मिश्र ने कहा कि कोर्ट का फैसला तर्कसंगत नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि हाथी की मूर्ति तो नॉर्थ ब्लाक और साउथ ब्लॉक में भी लगी है.

श्री मिश्र ने कहा कि चुनाव आयोग ने यह फैसला एक तरफा लिया है. हमें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया.  उन्होंने आगे कहा कि पार्को में लगी मूर्तियां स्वागत मुद्रा में हैं जबकि बसपा के चुनाव चिन्ह में हाथी की सूंड़ नीचे की ओर है. दोनों में अंतर हैं इसके बावजूद यह फैसला तर्कसंगत और न्‍याय संगत नहीं है.

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