30 दिसंबर को राजधानी मार्च (रायपुर) तमाम जेबी पत्रकार संघ के असहयोग और असफल करने की कोशिश के बाद भी सफल रहा. स्व. नेमीचंद जैन और स्व. साई रेड्डी को शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर बूढ़ा तालाब स्थित धरना स्थल पर हमेशा सत्य-संघर्ष को प्रोत्साहित करने वाले वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार आदरणीय गिरीश पंकज की उपस्थिति से मिडिया की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए शुरू किये गए इस संघर्ष को ताकत मिली.
इस धरना में छत्तीसगढ़ प्रेस क्लब व छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रानिक मिडिया एसोसिएशन के महा सचिव साथी अहफाज रशीद ने उपस्थित होकर इस मुद्दे के समर्थन में समस्त पत्रकारों की एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया. पत्रकारों की इस न्यायोचित मांग के समर्थन में " समाचार पत्र कर्मचारी संघ " का भी समर्थन मिला, संघ की और से साथी सनत तिवारी भी धरना स्थल में उपस्थित हुए. इनके साथ ही वरिष्ठ पत्रकार राज कुमार सोनी (पत्रिका), याग्वलक्य वशिष्ठ (हरिभूमि), पीसी रथ (नई-दुनिया), संजय दुबे (हिंदुस्तान समाचार), रवि कुमार माथुर, उत्तम राज देवांगन, डॉ. दिनेश मिश्रा, अखिलेश शुक्ला, तामेश्वर सिन्हा, प्रभात सिंह, सुभाष विश्वकर्मा, मनोज ध्रुव, प्रदीप चन्दौल, पंकज कुमार, चंद्रमोहन द्विवेदी, सूर्य कान्त देवांगन, शीतला प्रसाद गुप्ता आदि का भी हार्दिक आभार व्यक्त किया.
इन सभी की उपस्थिति, समर्थन और सलाह से ये आंदोलन अगले पडाव की ओर चल पड़ा चला है.
निर्भीक और निरपेक्ष पत्रकारिता के लिए हर संघर्ष में अगुवा रहने वाले सुधीर सक्सेना "आजाद" और सिकंदर बाघ जिन्होंने कम समय में सूचना में व्ययवस्था बनाने और मिडिया में उचित कवरेज दिलाने के लिए प्रयास किया. उनसे इस आंदोलन को निर्णायक स्थिति में पहुंचाने तक सक्रियता की अपेक्षा है.
३० दिसंबर को सभी साथियों से सलाह कर निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह से मिलकर ज्ञापन देने के बजाय, पूरे प्रदेश के सभी पत्रकार साथी अलग-अलग, अपने-अपने ओर से केवल अपने पद और नाम से नक्सल हिंसा के शिकार पत्रकार साथी नेमीचंद जैन व साई रेड्डी को शहीद का दर्जा दिया जाये.
भविष्य में भी नक्सल हिंसा में वाले साथियों को शहीद का दर्जा देने के लिए अध्यादेश जारी किया जाये. निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने के लिए पत्रकार साथी साई रेड्डी के नाम से पुरस्कार की घोषणा की जाये. जिन्हें अपनी निर्भीक कलम की वजह से प्रदेश सरकार और नक्सली दोनों की प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा. ज्ञापन अपने मेल या एसएमएस से अथवा कोरियर या डाक से सीधे मुख्यमंत्री रमन सिंह, मुख्य सचिव सुनील कुमार, गृह मंत्री राम सेवक पैकरा व अपने विधायक को भेजें.
ज्ञापन देने का यह अभियान ५ जनवरी से २५ जनवरी तक चलाया जायेगा. सभी साथी जिम्मेदारी और जवाबदारी से अधिक से अधिक संख्या में ज्ञापन भिजवाने के लिए जुट जाएं.
ओरछा से बीजापुर तक पदयात्रा की तिथि घोषित गणतंत्र दिवस से शुरू और गांधी पुण्यतिथि को संपन्न होगी. इसके साथ ही माओवादियों से मिडिया की स्वतंत्रता बनाये रखने की अपील, मिडिया का मुंह दबाने की कोशिश के खिलाफ व निर्भीक निरेपक्ष होकर पत्रकारिता का माहौल बनाने का संदेश देने के लिए नारायणपुर जिले के ओरछा से बीजापुर तक पदयात्रा की तिथि भी इस दिन घोषित कर दी गयी है. पद यात्रा गणतंत्र दिवस से शुरू होगी और गांधी जी की पुण्यतिथि को संपन्न होगी.
इस पदयात्रा में शामिल होने से पहले आप जान लें कि पदयात्रा का लगभग 65किमी मार्ग अबुझमाड़ से होकर जायेगा जो मिडिया और सरकार के अनुसार नक्सलियों के प्रभाव का इलाका है. इस आंदोलन में शामिल होना आपकी इच्छा और खुद के रिस्क पर है. हिंसा को आंदोलन का हथियार बताने वालों के मिडिया नीति के खिलाफ यह अपनी तरह का पहला आंदोलन है. पदयात्रा में 26 जनवरी को पहला पड़ाव 13किमी दूर आदेर ग्राम है. जहां से 19 किमी दूर जाटलूर 27 जनवरी को दूसरा पड़ाव होगा. संभवतः 28 जनवरी को अगला पड़ाव लंका और 29 को कुटरु (जिला-बीजापुर) हो सकता है.
इस पदयात्रा में शामिल होने की सहमति अब-तक गिरीश पंकज, राजीव रंजन प्रसाद, बप्पी राय, तामेश्वर सिन्हा, अब्दुल हमीद सिद्दीकी, प्रभात सिंह, सुधीर तम्बोली आजाद, मनोज ध्रुव, नितिन सिन्हा, याज्ञवाल्मीकि वशिष्ठ का मिल चुका है. जिन अन्य साथियों को इस यात्रा में शामिल होना है वे कृपया इस पोस्ट के कमेंट बाक्स में सहमति प्रदान करें. पदयात्रा में शामिल होने के लिए आपको आवश्यक दवा, हल्का वजन वाला गर्म कपडा, पिट्ठु बैग के साथ 25 जनवरी को नारायणपुर पहुचना है.